Chhattisgarh Junior Doctors Strike: छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, बॉन्ड की अवधि कम करने और वेतन-मानदेय से जुड़े मुद्दों समेत 17 सूत्रीय मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर लंबे समय से सरकार से समाधान की मांग कर रहे हैं। प्रदेश के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में भी जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर कैंडल मार्च निकाला। डॉक्टरों का कहना है कि पहले सरकार के सामने अपनी मांगें रखी गई थीं और जल्द आदेश जारी होने का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक ठोस निर्णय नहीं होने के कारण आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के बाद भी नहीं निकला समाधान
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर स्टाइपेंड समेत अपनी मांगों पर चर्चा की थी। डॉक्टरों का कहना है कि बातचीत के दौरान मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन मिला था।
इसके बाद भी मांगों को लेकर अंतिम आदेश जारी नहीं होने पर डॉक्टरों ने चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाया है। इससे पहले भी जूनियर डॉक्टरों की ओर से सरकार को मांगों के समाधान के लिए समय दिया गया था।
कैंडल मार्च के बाद अब 24 सितंबर की चेतावनी
अंबिकापुर में जूनियर डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकालकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। डॉक्टरों का कहना है कि अगर 23 सितंबर तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस आदेश जारी नहीं होता है, तो 24 सितंबर से आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, 24 सितंबर से OPD और इमरजेंसी सेवाओं के बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। इससे सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
क्या हैं जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांगें?
जूनियर डॉक्टरों की 17 सूत्रीय मांगों में MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, PG रेजिडेंट के वेतन और मानदेय में संशोधन, सीनियर रेजिडेंट और बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट से जुड़े भुगतान में बदलाव समेत कई लंबित मुद्दों का समाधान शामिल है।
डॉक्टरों की ओर से बॉन्ड से जुड़े मामलों और चिकित्सा सेवाओं से संबंधित अन्य लंबित विषयों पर भी सरकार से निर्णय की मांग की गई है।
पहले भी दिया जा चुका है आंदोलन का अल्टीमेटम
जूनियर डॉक्टर इससे पहले भी अपनी मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दे चुके हैं। अगस्त में भी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। उस दौरान स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर सरकार की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन टाल दिया गया था।
डॉक्टरों का कहना है कि मांगों पर ठोस आदेश नहीं आने के कारण उन्हें दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
मरीजों पर पड़ सकता है असर
अगर जूनियर डॉक्टरों का बहिष्कार आगे बढ़ता है, तो इसका सीधा असर सरकारी अस्पतालों की OPD और अन्य नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में बड़ी संख्या में इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर मरीजों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार और जूनियर डॉक्टरों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं। फिलहाल डॉक्टरों ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।
