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कोल लेवी केस में 9 आरोपी कोर्ट पहुंचे, देवेंद्र यादव बोले- संविधान पर भरोसा; EOW आज पेश करेगी अंतिम आरोप पत्र

रायपुर.  कथित 570 करोड़ रुपए के कोल लेवी घोटाले में EOW सोमवार, 5 अक्टूबर को स्पेशल कोर्ट में अंतिम आरोप पत्र पेश करेगी। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव समेत 9 आरोपी कोर्ट पहुंचे हैं। यादव ने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया और संविधान पर पूरा भरोसा है और कोई उनकी आवाज दबा नहीं सकता।

देवेंद्र यादव ने बीजेपी पर विपक्षी नेताओं को डराने और फंसाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आम जनता और विपक्ष दोनों का हाल एक जैसा है और सरकार उद्योगपतियों के सामने गिरवी है। चिंतामणि महाराज का जिक्र करते हुए यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी में शामिल होने के बाद लोग बरी हो जाते हैं।

यादव ने कहा, “मैं राहुल गांधी का सिपाही हूं, हर मोर्चे पर खड़ा रहूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जेल की दीवारें उनका इरादा नहीं तोड़ पाईं तो सरकार क्या तोड़ पाएगी।

9 आरोपी कोर्ट पहुंचे

मामले में पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, रामगोपाल अग्रवाल, IAS जयप्रकाश मौर्य और दीपेश टांक समेत 9 आरोपी कोर्ट पहुंचे हैं। पूर्व विधायक चंद्रदेव राय और कांग्रेस नेता विनोद तिवारी भी कोर्ट में मौजूद हैं।

EOW का दावा है कि कोल लेवी की रकम में से नेताओं को 65 करोड़ रुपए और अफसरों को 36 करोड़ रुपए से अधिक मिले। जांच के दौरान अब तक 170 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त किए जाने की बात एजेंसी ने कही है।

एजेंसी के मुताबिक, IAS जयप्रकाश मौर्य ने कथित तौर पर प्रॉपर्टी में, विधायक देवेंद्र यादव ने चुनाव में और पूर्व विधायक चंद्रदेव राय ने ज्वेलरी में करोड़ों रुपए खर्च किए। FIR में नामजद आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए सबूतों के आधार पर अंतिम आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा।

चिंतामणि महाराज को लेकर भी उठाए सवाल

देवेंद्र यादव ने चिंतामणि महाराज का नाम लेते हुए कहा कि शुरुआत में केस की फाइल में उनका नाम “स्वर्ण अक्षरों” में था, लेकिन बीजेपी सांसद बनने के बाद अब उनका नाम नहीं लिखा जाएगा। यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी में शामिल होने के बाद लोग बरी हो जाते हैं।

8 नेताओं और अफसरों पर सबसे ज्यादा फायदा लेने का आरोप

ED की चार्जशीट के मुताबिक, 570 करोड़ रुपए के कथित कोल स्कैम में 8 नेताओं और अफसरों को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचा। आरोप है कि कोल लेवी की रकम से प्रॉपर्टी खरीदी गई, ज्वेलरी ली गई और चुनाव में पैसा खर्च किया गया।

चार्जशीट के अनुसार, कथित मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी से सौम्या चौरसिया ने 169 बार में 31 करोड़ रुपए लिए। निलंबित IAS रानू साहू पर 13 बार में 5.52 करोड़ रुपए लेने का आरोप है। वहीं कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को 11 बार में 3 करोड़ रुपए मिलने का दावा किया गया है।

ED के अनुसार, देवेंद्र यादव ने यह रकम खैरागढ़ उपचुनाव और UP चुनाव में खर्च की।

चंद्रदेव राय पर 46 लाख रुपए लेने का आरोप

ED की जांच के मुताबिक, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय ने सूर्यकांत तिवारी से दो बार में 46 लाख रुपए लिए। आरोप है कि इसमें से 42 लाख रुपए UP चुनाव में खर्च किए गए, जबकि 4 लाख रुपए से रायपुर की एक ज्वेलरी शॉप से उनकी पत्नी के लिए 60 ग्राम सोने का हार खरीदा गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, सूर्यकांत तिवारी कोल वाशरी और ट्रांसपोर्टर्स से वसूली गई रकम अपने कर्मचारियों के जरिए नेताओं और अफसरों तक पहुंचाता था। इसमें निखिल चंद्राकर की अहम भूमिका बताई गई है।

कोल लेवी की रकम कैसे जुटाई जाती थी?

ED की चार्जशीट के अनुसार, कोल ट्रांसपोर्टिंग करने वालों से वसूली की जाती थी। कोल वाशरी संचालकों से 100 रुपए प्रति टन और वाशरी से कोयला निकलने पर 25 रुपए प्रति टन अतिरिक्त ट्रांसपोर्टिंग शुल्क लिए जाने का आरोप है।

आरोप के मुताबिक, कोयला कारोबारियों से दो बार कमीशन लिया जाता था। कोरबा और रायगढ़ में वसूली के लिए अलग-अलग कार्यालय बनाए गए थे। वसूली गई रकम सूर्यकांत तिवारी के पास पहुंचती थी और इसके बाद नेताओं तथा अफसरों को तय डील के मुताबिक रकम दी जाती थी।

देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी की WhatsApp चैट का जिक्र

ED के मुताबिक, देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच WhatsApp पर बातचीत होती थी। चार्जशीट में खैरागढ़ चुनाव, रायपुर आने, मिलने का समय और इंतजार करने से जुड़ी बातचीत का जिक्र है।

ED के अनुसार, एक चैट में देवेंद्र यादव ने सूर्यकांत तिवारी से मिलने की जगह और समय को लेकर बातचीत की। इसके बाद दोनों के बीच अनुपम नगर पहुंचने और खैरागढ़ जाने से पहले मिलने को लेकर संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। एजेंसी ने चार्जशीट में इस बातचीत के WhatsApp स्क्रीनशॉट भी शामिल किए हैं।

ज्वेलरी खरीदने को लेकर भी चैट का दावा

ED की जांच के अनुसार, चंद्रदेव राय और सूर्यकांत तिवारी के बीच भी WhatsApp पर बातचीत हुई थी। एजेंसी का आरोप है कि राय ने ज्वेलरी खरीदने को लेकर सूर्यकांत से दुकान के बारे में पूछा था।

चार्जशीट के मुताबिक, चंद्रदेव राय ने 60 ग्राम के सोने के हार की फोटो भेजकर उसकी कीमत 4 लाख 30 हजार रुपए बताई थी। इसके बाद सूर्यकांत की ओर से हार खरीदने की बात कही गई। जांच एजेंसी का दावा है कि बाद में चंद्रदेव राय के ड्राइवर ने एक होटल से पैसे लेकर ज्वेलरी शॉप पर दिए।

विनोद तिवारी पर 1.87 करोड़ रुपए लेने का आरोप

ED के मुताबिक, कांग्रेस नेता विनोद तिवारी ने कथित कोल लेवी सिंडिकेट से 19 किश्तों में 1 करोड़ 87 लाख रुपए लिए। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल खैरागढ़ चुनाव और प्रॉपर्टी खरीदने में किया गया। एजेंसी ने विनोद तिवारी और सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई बातचीत को भी जांच में शामिल किया है।

RP सिंह पर 2.01 करोड़ रुपए लेने का आरोप

कांग्रेस नेता RP सिंह पर 2 करोड़ 1 लाख 40 हजार रुपए लेने का आरोप है। ED के अनुसार, पूछताछ में उन्होंने यह रकम लेने की बात स्वीकार की और बताया कि इसका इस्तेमाल पार्टी के लिए गाड़ियों और मीडिया की व्यवस्था में किया गया।

क्या है छत्तीसगढ़ का कोल लेवी मामला?

ED का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में कोयले के परिवहन और ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने समेत अलग-अलग तरीकों से 570 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली की गई। मामले में 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

ED की रेड के दौरान सामने आए इस मामले में आरोप है कि कोयला परिवहन के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर दिया गया था। इसके लिए खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को आदेश जारी किया था।

2 पूर्व मंत्रियों, विधायकों समेत 36 लोगों पर FIR

ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB/EOW ने दो पूर्व मंत्रियों और विधायकों समेत 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। मामले की जांच ACB-EOW कर रही है।

IAS रानू साहू, IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, JD माइनिंग SS नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।

3 IPS अधिकारियों के संपर्क में होने का दावा

ED की चार्जशीट के मुताबिक, तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के संपर्क में IPS पारुल माथुर, IPS प्रशांत अग्रवाल और IPS भोजराम पटेल थे।

इन अधिकारियों पर विभाग से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं IPS पारुल माथुर पर कारोबारी के कहने पर कोयला लेकर जा रहे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप है। कॉन्स्टेबल अमित कुमार दुबे पर ED अधिकारियों की जासूसी करने का आरोप लगाया गया है।

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