Kawardha News: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से गोवंश की मौत और बड़ी संख्या में पशुओं के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। लोहारा क्षेत्र के सुरजपुरा और पिरछा टोला गांव में कथित तौर पर एक रहस्यमयी बीमारी फैलने से गोवंश की जान जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, अब तक तीन से चार गोमाताओं की मौत हो चुकी है, जबकि 40 से अधिक गोवंश बीमार बताए जा रहे हैं। बीमारी की सूचना देने के बावजूद पशु चिकित्सकों के मौके पर नहीं पहुंचने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।
कवर्धा में गोवंश पर संकट, दो गांवों में फैली बीमारी
जानकारी के मुताबिक, लोहारा क्षेत्र के सुरजपुरा और पिरछा टोला गांव में बुधवार देर शाम से गोवंश के बीमार पड़ने की खबर सामने आने लगी। देखते ही देखते बीमार पशुओं की संख्या बढ़ने लगी, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई गोवंश की हालत खराब है और समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। हालांकि, पशुओं में फैल रही बीमारी की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
खेतों में बचे फसल के डंठल खाने से बीमारी की आशंका
गोवंश के बीमार होने के पीछे ग्रामीण खेतों में फसल कटाई के बाद बचे डंठलों को संभावित वजह मान रहे हैं। उनका आशंका है कि इन अवशेषों में जहरीले पदार्थ मौजूद हो सकते हैं, जिन्हें चारे के रूप में खाने से पशु बीमार पड़ रहे हैं।
फिलहाल यह केवल आशंका है। बीमारी का वास्तविक कारण क्या है और क्या इसका संबंध फसल के अवशेषों से है, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सूचना के बावजूद पशु चिकित्सकों के नहीं पहुंचने का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर सवाल पशुओं को समय पर इलाज मिलने को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने बुधवार देर शाम से ही पशु चिकित्सा विभाग को सूचना देनी शुरू कर दी थी, लेकिन गुरुवार सुबह तक कोई डॉक्टर या विशेषज्ञ मौके पर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों के अनुसार, स्थानीय पशु सेवक बीमार गोवंश को प्राथमिक उपचार दे रहे हैं। लेकिन बड़ी संख्या में पशुओं के बीमार होने के कारण विशेषज्ञों की मदद की जरूरत महसूस की जा रही है।
बढ़ती मौतों से ग्रामीणों में नाराजगी
बीमार गोवंश की बढ़ती संख्या और कथित तौर पर समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही उचित इलाज और जांच की व्यवस्था नहीं की गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इस मामले में विभाग की ओर से अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पशु चिकित्सा विभाग कब तक प्रभावित गांवों में टीम भेजता है और बीमार गोवंश के उपचार के लिए क्या कदम उठाता है।
बीमारी की असली वजह जांच के बाद ही होगी स्पष्ट
फिलहाल गोवंश की बीमारी और मौतों के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फसल के अवशेषों में जहरीले पदार्थ होने की आशंका की भी जांच जरूरी है। प्रभावित पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और बीमारी के कारण का पता लगाना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
अब सवाल यह है कि गोवंश के बीमार होने की सूचना मिलने के बाद पशु चिकित्सा विभाग कब सक्रिय होगा और प्रभावित गांवों में इलाज की व्यवस्था कब तक पहुंचेगी।
