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Amit Shah Rahul Gandhi: ‘संसद चलने दीजिए, दो-दो हाथ कर लीजिए’, राहुल गांधी को अमित शाह की खुली चुनौती

Amit Shah on Rahul Gandhi: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने नक्सलवाद और कांग्रेस की भूमिका को लेकर कई तीखे बयान दिए। नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में Amit Shah ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने माओवादियों की असंवैधानिक ‘जनताना सरकार’ का समर्थन किया और अब राहुल गांधी ने ‘नकली संसद’ आयोजित कर देश की संसद का मजाक उड़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीति स्पष्ट है, कानून का पालन करने वालों को नागरिक अधिकारों के साथ सुरक्षा मिलेगी, जबकि कानून तोड़ने वालों से सुरक्षा बल सख्ती से निपटेंगे।

‘कांग्रेस ने नक्सलवाद को खत्म करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई’

Amit Shah ने छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के 15 साल के कार्यकाल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान प्रदेश में विकास के कई काम हुए, लेकिन केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में नक्सलवाद को खत्म करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी। इसके कारण आदिवासी क्षेत्रों में विकास का सपना अधूरा रह गया।

Amit Shah ने कहा कि वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद राज्य सरकार ने दो महीने के भीतर नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया। उनके मुताबिक, नक्सलवाद ने बस्तर के विकास और वहां की सांस्कृतिक पहचान को लंबे समय तक प्रभावित किया।

‘जहां स्कूल की घंटी बजनी थी, वहां इमारतें उड़ा दी गईं’

नक्सलवाद के प्रभाव का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने बस्तर के हालात को लेकर भावुक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस धरती पर संस्कृति की गलियां होनी चाहिए थीं, वहां रेड कॉरिडोर बना दिया गया। जंगलों से महुआ, तेंदूपत्ता और लोकगीतों की पहचान होनी चाहिए थी, लेकिन वहां बारूदी सुरंगें बिछाई गईं।

Amit Shah ने कहा कि जिन बच्चों के हाथों में कलम होनी चाहिए थी, उन्हें स्कूल से अगवा कर बंदूक थमा दी गई। जहां स्कूलों में घंटी बजनी चाहिए थी, वहां स्कूलों की इमारतें तक उड़ा दी गईं।

मानवाधिकार के मुद्दे पर भी कांग्रेस और नक्सल समर्थकों को घेरा

Amit Shah ने मानवाधिकारों के नाम पर नक्सलवाद का समर्थन करने वालों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या मानवाधिकार केवल हथियार उठाने वाले माओवादियों के लिए हैं या फिर उन गरीब आदिवासियों के लिए भी हैं, जिनका जीवन हिंसा के कारण प्रभावित हुआ?

उन्होंने बताया कि पिछले 30 वर्षों में नक्सली हिंसा के कारण जिन लोगों ने अपने अंग गंवाए हैं, सरकार उन्हें कृत्रिम अंग उपलब्ध करा रही है, ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें।

Amit Shah ने बस्तर की स्थिति पर लेख लिखने वाले लोगों को भी वहां आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले बस्तर के हालात पर सलाह देते थे, उन्हें अब यहां आकर विकास कार्यों और लोगों की स्थिति को करीब से देखना चाहिए।

चिदंबरम के पुराने बयान का किया जिक्र

कांग्रेस पर नक्सलवाद का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए अमित शाह ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के वर्ष 2010 के एक बयान का भी जिक्र किया। शाह के मुताबिक, चिदंबरम ने उस समय कहा था कि माओवादियों को हथियार डालने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें हिंसा छोड़नी चाहिए।

इसके जवाब में Amit Shah ने कहा कि मोदी सरकार की नीति स्पष्ट है। जो लोग आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, उन्हें हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना होगा। जो ऐसा करने से इनकार करेंगे, उनके खिलाफ सुरक्षा बल कार्रवाई करेंगे।

गृह मंत्री ने दावा किया कि 90 प्रतिशत माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 10 प्रतिशत मारे गए हैं। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि देश नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है।

‘राहुल गांधी ने नकली जनताना सरकार का समर्थन किया’

Amit Shah ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने माओवादियों की समानांतर ‘जनताना सरकार’ का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि इस कथित सरकार का अपना मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री था, जबकि उसे कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं था।

शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने ऐसी असंवैधानिक व्यवस्था का समर्थन किया और अब ‘नकली संसद’ आयोजित कर संसद का मजाक उड़ाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों से संसद में चर्चा का केवल दिखावा किया जा रहा है।

राहुल गांधी को अमित शाह की चुनौती- ‘संसद चलने दीजिए, दो-दो हाथ कर लीजिए’

अपने संबोधन में अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में चर्चा की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र बुलाकर भी चर्चा की जा सकती है।

Amit Shah ने कहा, “राहुल जी, संसद चलने दीजिए। हम विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। अगर हिम्मत है तो देश की जनता के सामने चर्चा करके दिखाइए।”

उन्होंने आगे कहा कि केवल हाथ में संविधान लेकर घूमने से संविधान का समर्थन नहीं होता, बल्कि आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए। शाह ने राहुल गांधी से संसद चलने देने और चर्चा में दो-दो हाथ करने की बात कही। उनके मुताबिक, चर्चा से जनता को पता चल जाएगा कि कौन सही है और कौन गलत।

राज्योत्सव के मंच से नक्सलवाद और सियासत पर बड़ा संदेश

नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह में Amit Shah के भाषण का मुख्य केंद्र नक्सलवाद, बस्तर का विकास और कांग्रेस की भूमिका रही। एक ओर उन्होंने सुरक्षा बलों की कार्रवाई और आत्मसमर्पण नीति का जिक्र किया, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी और कांग्रेस पर कई राजनीतिक आरोप लगाए। उनके बयानों से राज्योत्सव का समापन समारोह विकास के मुद्दों के साथ-साथ सियासी बहस का भी केंद्र बन गया।

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