Shardiya Navratri 2026: मां दुर्गा की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ नौ दिनों की पूजा की शुरुआत होती है। ऐसे में भक्तों के मन में सवाल है कि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, पूजा के लिए कौन-कौन सी सामग्री चाहिए और स्थापना की सही विधि क्या है?
शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस वर्ष प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
रायपुर के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना का सुबह का मुहूर्त सुबह 5:58 बजे से 9:52 बजे तक है। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:26 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक रहेगा।
ध्यान दें कि कलश स्थापना का मुहूर्त शहर और पंचांग के अनुसार कुछ अलग हो सकता है। इसलिए पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग या पंडित से समय की पुष्टि जरूर करें।
राहुकाल कब से कब तक रहेगा?
11 अक्टूबर को राहुकाल का समय लगभग शाम 4:34 बजे से 6:01 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में शुभ कार्यों की शुरुआत से बचा जाता है। इसलिए कलश स्थापना के लिए सुबह का शुभ मुहूर्त या स्थानीय पंचांग में दिया गया उपयुक्त समय चुनें।
कैसे करें घटस्थापना या कलश स्थापना?
नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए पूजा स्थान को साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद नीचे दी गई विधि के अनुसार पूजा की तैयारी कर सकते हैं।
मिट्टी का पात्र तैयार करें: पात्र में मिट्टी भरकर जौ के बीज बोएं। इसे कलश के नीचे स्थापित करें।
कलश सजाएं: मिट्टी या तांबे के कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और उसके गले में मौली बांधें।
कलश में जल भरें: साफ पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाएं। परंपरा के अनुसार इसमें सिक्का, हल्दी, सुपारी और अक्षत डाल सकते हैं।
पत्ते और नारियल रखें: कलश के मुख पर पांच प्रकार के पत्ते रखें। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें।
मां दुर्गा की पूजा करें: कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें, पूजा-अर्चना करें और आरती के साथ अनुष्ठान की शुरुआत करें।
पूजा की सामग्री और विधि परिवार तथा क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।
नवरात्रि के पहले दिन कौन-सी देवी की पूजा होती है?
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। भक्त माता को पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
कलश स्थापना से पहले इन बातों का रखें ध्यान
कलश स्थापना के लिए पूजा स्थल और पूजन सामग्री पहले से तैयार रखें। मुहूर्त को लेकर अलग-अलग समय सामने आने पर अपने शहर के पंचांग को प्राथमिकता दें। यदि कोई विशेष पारिवारिक परंपरा है, तो उसके अनुसार पूजा विधि के लिए जानकार पंडित की सलाह ले सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग पर आधारित है। मुहूर्त स्थान के अनुसार बदल सकता है। पूजा से संबंधित निर्णय लेने से पहले स्थानीय पंचांग या संबंधित विशेषज्ञ से पुष्टि करें।
