बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 28 अगस्त की रात दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक हो गया। खपरगंज इलाके में पथराव और तोड़फोड़ की घटना के बाद पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। घटना में कई वाहन, दुकान और मकान क्षतिग्रस्त हुए।
पथराव के दौरान तारबाहर थाना प्रभारी रवि तिवारी के सिर में चोट लगी, जबकि एक आरक्षक समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक पक्ष से 8 और दूसरे पक्ष से 3 आरोपी बताए गए हैं।
पुलिस अब CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर हिंसा में शामिल बाकी लोगों की पहचान कर रही है।
कथित धार्मिक टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद
पुलिस के मुताबिक, खपरगंज में एक बिरयानी सेंटर के पास कुछ युवकों के बीच छींटाकशी और कथित धार्मिक टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ था। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई।
पुलिस के पहुंचने से पहले एक बुजुर्ग के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। इसके बाद दोनों पक्षों के लोग मौके पर जुटने लगे। भीड़ बढ़ने के साथ ही स्थिति बिगड़ती गई और पथराव व तोड़फोड़ शुरू हो गई।
आसपास के इलाकों तक पहुंचा तनाव
शुरुआत में खपरगंज क्षेत्र तक सीमित विवाद बाद में आसपास के इलाकों तक फैल गया। उपद्रवियों ने कथित तौर पर कई वाहनों, दुकानों और मकानों को नुकसान पहुंचाया।
हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल मौके पर पहुंचा। भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसके बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया गया।
दोनों पक्षों से 11 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, अब तक दोनों पक्षों से कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 8 आरोपी एक पक्ष और 3 आरोपी दूसरे पक्ष से बताए जा रहे हैं।
SSP रजनेश सिंह के मुताबिक, ठाकुर रामसिंह और सोहेल खान सहित कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल नाम सामने आने के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और पूछताछ से सामने आए तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात
घटना के बाद शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है। पुलिस ने पेट्रोलिंग बढ़ा दी है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा न करें। सोशल मीडिया पर भी बिना पुष्टि के किसी वीडियो, फोटो या दावे को शेयर नहीं करने की सलाह दी गई है।
वायरल वीडियो और पोस्ट की भी जांच
हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट को भी पुलिस जांच के दायरे में लेकर चल रही है। साइबर सेल यह पता लगाने में जुटी है कि किसी भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश तो नहीं की गई।
SSP ने कहा है कि अफवाह फैलाने, भ्रामक जानकारी प्रसारित करने या आपत्तिजनक सामग्री के जरिए माहौल खराब करने वालों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की
पुलिस प्रशासन ने लोगों से संयम बनाए रखने और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की है। फिलहाल पुलिस CCTV और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के जरिए हिंसा में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है।
