डायवर्सन, भू-अर्जन, नामांतरण और सीमांकन के प्रकरणों की समीक्षा; कलेक्टर बोलीं- सही आदेश और समय पर न्याय सर्वोच्च प्राथमिकता
कवर्धा। कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने शुक्रवार को पंडरिया अनुविभागीय न्यायालय और तहसील न्यायालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न्यायालयीन कार्यों और लंबित राजस्व प्रकरणों की समीक्षा की। कलेक्टर ने डायवर्सन, भू-अर्जन, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अपील सहित अन्य मामलों की जानकारी ली।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण में तथ्यों का बारीकी से परीक्षण कर निष्पक्ष और न्यायसंगत आदेश पारित किए जाएं। उन्होंने कहा कि सही आदेश और समय पर न्याय देना सर्वोच्च प्राथमिकता है। न्यायालयीन कार्यों में अनावश्यक देरी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अपील और लंबित मामलों की भी ली जानकारी

कलेक्टर ने अपील प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से पूछा कि कितने मामलों में अपील हुई और कितने आदेश परिवर्तित या निरस्त किए गए। उन्होंने कहा कि इन मामलों के आधार पर तहसीलदारों के न्यायालयीन कार्यों की भी समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने वरिष्ठ न्यायालयों से संबंधित प्रकरण समय पर प्रस्तुत करने और निचले न्यायालय से किसी प्रकरण को मंगाए जाने पर उसे तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
पक्षकारों को समय पर तामीली कराने के निर्देश

कलेक्टर ने कहा कि निर्धारित पेशी के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सभी पक्षकारों को समय पर तामीली कराई जाए, ताकि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिल सके।
भू-अर्जन प्रकरणों की समीक्षा के दौरान उन्होंने किसानों से जुड़े मामलों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों और अन्य पक्षकारों की बात गंभीरता से सुनकर नियमानुसार निर्णय लिया जाए।
डायवर्सन की प्रक्रिया लोगों को सरल भाषा में बताएं

डायवर्सन प्रकरणों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों को प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की सरल जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इसका उद्देश्य लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना है।
उन्होंने राजस्व प्रकरणों में पारदर्शिता और समय-सीमा का पालन करते हुए लंबित मामलों का तेजी से निराकरण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि आगामी निरीक्षण में न्यायालय के प्रकरणों का एक-एक कर अवलोकन किया जाएगा।
इस दौरान पंडरिया एसडीएम श्री संदीप ठाकुर और तहसीलदार सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
ई-अटेंडेंस में लापरवाही नहीं चलेगी
न्यायालयों के निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने एसडीएम एवं तहसील कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों की बैठक लेकर विभागवार कार्यों और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की।
उन्होंने सभी अधिकारी-कर्मचारियों को कार्यालयीन समय का पालन करने और अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि सुबह 10 बजे कार्यालय पहुंचने और कार्यालय से प्रस्थान करते समय बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है।
उन्होंने उपस्थिति रिपोर्ट का अवलोकन किया और जिन कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज नहीं थी, उन्हें नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज करने के निर्देश दिए। एसडीएम और तहसीलदार को इसकी नियमित निगरानी करने को कहा गया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अगले निरीक्षण में बायोमैट्रिक उपस्थिति की भी जांच की जाएगी।
ई-ऑफिस में तेजी लाने के निर्देश
कलेक्टर ने राज्य शासन के निर्देशानुसार सभी शासकीय कार्य शत-प्रतिशत ई-ऑफिस के माध्यम से करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस के माध्यम से फाइल संबंधित अधिकारी तक उसी दिन पहुंच सकती है, जिससे काम के निराकरण में तेजी आएगी और फाइल की स्थिति की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी।
कलेक्टर ने सभी तहसीलों के कर्मचारियों को ई-ऑफिस का प्रशिक्षण दिलाने और इसकी नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस में काम करना अब प्राथमिकता नहीं, बल्कि अनिवार्य व्यवस्था है।
