Shardiya Navratri 2026 Day 2: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो चुका है। Shardiya Navratri के दूसरे दिन सोमवार, 12 अक्टूबर को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक हैं। भक्त इस दिन माता की विधि-विधान से पूजा करके सुख, शांति और आत्मबल की कामना करते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 11 अक्टूबर की रात 9:31 बजे से शुरू होकर 12 अक्टूबर की रात 10:13 बजे तक रहेगी। इसी कारण 12 अक्टूबर को नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी।
अगर आप भी Shardiya Navratri के दूसरे दिन माता की पूजा करने जा रहे हैं, तो जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र, प्रिय भोग, शुभ रंग और पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
मां ब्रह्मचारिणी पूजा 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त
Shardiya Navratri के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा सुबह स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद की जा सकती है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित कर सकते हैं।
- पूजा की तारीख: सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
- द्वितीया तिथि: 11 अक्टूबर की रात 9:31 बजे से 12 अक्टूबर की रात 10:13 बजे तक।
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, पूजा के लिए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:41 बजे से 5:30 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:06 बजे से 6:20 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:03 बजे से 2:50 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 2:35 बजे से शाम 4:16 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:55 बजे से 6:20 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:55 बजे से शाम 7:09 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:43 बजे से 13 अक्टूबर की रात 12:33 बजे तक।
ध्यान दें कि ये समय दिए गए पंचांग विवरण पर आधारित हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के अंतर के कारण कुछ मुहूर्त बदल सकते हैं। पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।
कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी और क्या है उनके स्वरूप का महत्व?
मां ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
‘ब्रह्म’ का संबंध तप और आध्यात्मिक साधना से तथा ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली से जोड़ा जाता है। इस प्रकार मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तपस्या के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
माता के एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। उनका स्वरूप भक्तों को धैर्य रखने, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने का संदेश देता है।
मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग कौन-सा है?
Shardiya Navratri के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में सफेद रंग का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त सफेद वस्त्र पहनकर माता की आराधना करते हैं और पूजा में सफेद फूल अर्पित करते हैं।
सफेद रंग को शांति, पवित्रता, सरलता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, नवरात्रि के रंगों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराएं भी प्रचलित हैं।
मां ब्रह्मचारिणी को कौन-सा भोग लगाएं?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को फल, मिश्री, पंचामृत, खीर और सफेद मिठाइयों का भोग अर्पित किया जा सकता है।
पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:
- माता को स्वच्छ और सात्विक भोग अर्पित करें।
- सफेद फूल और ताजे फल पूजा में शामिल कर सकते हैं।
- पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटें।
- भोग और पूजा सामग्री का चयन अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।
मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र
Shardiya Navratri के दूसरे दिन माता की आराधना करते समय भक्त मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
मां ब्रह्मचारिणी का प्रचलित मंत्र:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
माता की स्तुति:
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
भक्त श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करके माता से धैर्य, ज्ञान, संयम और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें?
नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा करने के लिए इन सामान्य चरणों का पालन किया जा सकता है:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई करके माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- दीपक जलाएं और माता का ध्यान करें।
- माता को सफेद फूल, फल, मिश्री या अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करें।
- मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का जाप करें और दुर्गा माता की आरती करें।
- अंत में परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
- पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से क्या लाभ माने जाते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से भक्तों को आत्मबल, धैर्य और संयम की प्रेरणा मिलती है। माता का स्वरूप कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश देता है।
भक्त इस दिन सुख-शांति, समृद्धि, मानसिक दृढ़ता और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा को मन में सकारात्मक विचार और अनुशासन विकसित करने से भी जोड़ा जाता है।
कुछ धार्मिक मान्यताओं में माता की आराधना को मंगल दोष और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना के साथ भी जोड़ा जाता है। हालांकि, ये आस्था और परंपरा पर आधारित मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से सुनिश्चित परिणाम नहीं।
Shardiya Navratri के दूसरे दिन क्यों खास है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा?
Shardiya Navratri के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना साधना, संयम और संकल्प के महत्व को याद दिलाती है।
इस दिन भक्त माता को सफेद फूल अर्पित करते हैं, सात्विक भोग लगाते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यक्ति को कठिन समय में धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
