CGPSC Recruitment Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत कुल सात आरोपियों के खिलाफ विशेष PMLA कोर्ट में अभियोजन शिकायत यानी आरोपपत्र दाखिल किया है।
ED की ओर से दाखिल अभियोजन शिकायत 99 पेज की है, जबकि इसके साथ करीब 3,700 पेज के दस्तावेज भी पेश किए गए हैं। एजेंसी की जांच कथित पेपर लीक, चयन प्रक्रिया में अनियमितता और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन पर केंद्रित है।
आरोपपत्र में पेपर लीक से लेकर पैसों के लेनदेन तक का जिक्र
ED के आरोपों के मुताबिक, CGPSC की परीक्षाओं में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन में कथित तौर पर मदद पहुंचाने की कोशिश की गई। जांच में रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने और इसके बदले रकम लिए जाने से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।
एजेंसी ने कथित लेनदेन और पैसों के प्रवाह की भी जांच की है। आरोपपत्र में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका और उनके बीच हुए वित्तीय लेनदेन का ब्योरा शामिल बताया गया है।
रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए नियम बदलने का आरोप
ED के अनुसार, तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी पर आरोप है कि रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि 14 जुलाई 2021 की बैठक में ‘रिलेटिव’ की जगह ‘फैमिली’ शब्द किया गया और ‘नेफ्यू’ को परिवार की परिभाषा से बाहर किया गया।
ED का आरोप है कि टामन सिंह सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। दोनों के चयन का भी मामले में उल्लेख किया गया है। यह सभी आरोप जांच एजेंसी की अभियोजन शिकायत में लगाए गए हैं।
प्रश्पत्र की गोपनीयता तोड़ने में सहयोग का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग करने में कथित तौर पर सहयोग किया। आरोप है कि प्रश्नपत्र कारोबारी श्रवण गोयल तक पहुंचा और बाद में उनके बेटे शशांक गोयल तथा बहू भूमिका कटियार तक पहुंचाया गया।
ED के मुताबिक, शशांक और भूमिका दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ था।
चेतन बोरघरिया के खाते में लाखों के नकद लेनदेन का आरोप
आरोपपत्र में चेतन बोरघरिया की भूमिका को लेकर भी ED ने कई दावे किए हैं। एजेंसी के मुताबिक, उस समय मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे बोरघरिया के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल अभ्यर्थियों को नौकरी और प्रश्नपत्र दिलाने का भरोसा देने के लिए किए जाने का आरोप है।
ED की जांच में उनके बैंक खातों में बड़ी संख्या में नकद जमा होने की बात सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसी ने करीब 170 लेनदेन में 66.64 लाख रुपये से अधिक की नकद जमा का उल्लेख किया है।
तीन करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने का आरोप
ED ने उत्कर्ष चंद्राकर, डॉ. विकास चंद्राकर और अनिल चंद्राकर से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की है। एजेंसी के मुताबिक, उत्कर्ष और विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन कराने का भरोसा देकर तीन करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई।
ED का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों के नाम और संपर्कों का इस्तेमाल किया गया। जांच में जुटाई गई रकम में से करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए जाने की बात भी सामने आई है। एजेंसी ने रकम के आगे हुए लेनदेन की भी जांच की है।
अब आगे क्या होगा?
ED की अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एजेंसी ने आरोपपत्र में कथित मनी लॉन्ड्रिंग, पेपर लीक, चयन प्रक्रिया में अनियमितता और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज कोर्ट के सामने रखे हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि आरोपपत्र में लगाए गए आरोप ED की जांच और अभियोजन शिकायत में किए गए दावे हैं। इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी बाकी है।
