Kawardha News: अपराधियों की पहचान और आपराधिक मामलों की जांच को अधिक वैज्ञानिक बनाने के लिए कबीरधाम पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फिंगरप्रिंट और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। 29 अक्टूबर 2026 को कवर्धा के ट्रैफिक प्लाजा में आयोजित इस कार्यशाला में घटनास्थल से फिंगरप्रिंट जुटाने, साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और तकनीकी प्रणालियों के प्रभावी इस्तेमाल की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में NAFIS और MCU जैसी प्रणालियों पर विशेष जोर रहा।
कबीरधाम पुलिस की विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला
पुलिस महानिरीक्षक, राजनांदगांव रेंज, अजय कुमार यादव के निर्देशन और कबीरधाम पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार यादव के मार्गदर्शन में यह कार्यशाला आयोजित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार और अमित कुमार पटेल के दिशा-निर्देशों के तहत जिले के पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
दुर्ग एवं राजनांदगांव रेंज के फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ निरीक्षक धर्मेन्द्र कुमार भारती ने प्रशिक्षण के दौरान फिंगरप्रिंट की पहचान, वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और तकनीकी प्रणालियों के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया।

घटनास्थल से फिंगरप्रिंट जुटाने की प्रक्रिया समझाई
प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों को बताया गया कि किसी अपराध के घटनास्थल से फिंगरप्रिंट किस तरह प्राप्त किए जाते हैं और उन्हें सुरक्षित कैसे रखा जाता है। फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट के उपयोग के साथ वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन एवं विश्लेषण की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को उचित तरीके से संरक्षित किया जाए, ताकि विवेचना के दौरान उनका प्रभावी उपयोग हो सके। संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान में फिंगरप्रिंट की भूमिका और साक्ष्य आधारित जांच के महत्व पर भी जानकारी दी गई।
क्या है NAFIS और MCU? पुलिस को इनके इस्तेमाल की ट्रेनिंग
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) और मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (MCU) से जुड़ा रहा।
पुलिस अधिकारियों और वरिष्ठ आरक्षकों को इन तकनीकी प्रणालियों की कार्यप्रणाली और उपयोग के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण के दौरान समझाया गया कि फिंगरप्रिंट संबंधी तकनीकी संसाधन उपलब्ध रिकॉर्ड के सत्यापन, व्यक्तियों की पहचान और आपराधिक मामलों की जांच को व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकते हैं।

वैज्ञानिक साक्ष्यों के संरक्षण पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में केवल तकनीक के इस्तेमाल ही नहीं, बल्कि साक्ष्यों की विश्वसनीयता बनाए रखने पर भी ध्यान दिया गया। पुलिसकर्मियों को घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों के उचित संकलन, संरक्षण और विवेचना में तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया।
इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य पुलिसकर्मियों की तकनीकी कार्यकुशलता बढ़ाना और अपराधों की जांच में वैज्ञानिक तरीकों को प्रोत्साहित करना है।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों का रहा योगदान
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यशाला के सफल आयोजन और संचालन में निम्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा:
- सहायक उपनिरीक्षक चन्द्रभूषण सिंह — MCU प्रभारी
- सहायक उपनिरीक्षक शफीक कुरैशी
- प्रधान आरक्षक मन्नू चंद्रवंशी
- चेतक नाथ योगी — NAFIS प्रभारी
कबीरधाम पुलिस के अनुसार, अपराध अनुसंधान में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य साक्ष्य आधारित विवेचना को मजबूत करना और कानून के अनुरूप अपराधों के निराकरण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
