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कबीरधाम की बड़ी खबर :सोयाबीन किसानों के लिए कृषि विभाग की एडवाइजरी, सूखे और अतिवर्षा से फसल बचाने के बताए उपाय

कवर्धा। जिले में बदलते मौसम और सूखे व अतिवर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए फसल प्रबंधन एवं पौध संरक्षण संबंधी सलाह जारी की है। विभाग ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और मौसम व फसल की स्थिति के अनुसार आवश्यक उपाय अपनाने की अपील की है।

50-60 दिन की फसल में फफूंदजनित रोग से बचाव

कृषि विभाग के अनुसार 50-60 दिन की सोयाबीन फसल में संभावित फफूंदजनित रोगों से बचाव के लिए सुरक्षात्मक रूप से अनुशंसित फफूंदनाशक फ्लक्सापायरोक्साड + पायरोक्लोस्ट्रोबिन (300 ग्राम प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव किया जा सकता है। नैपसेक स्प्रेयर से प्रति हेक्टेयर 500 लीटर और ट्रैक्टर चलित पावर स्प्रेयर से न्यूनतम 200 लीटर पानी का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

सूखे की स्थिति में भूमि में दरारें पड़ने से पहले जरूरत के अनुसार स्प्रिंकलर, ड्रिप या परंपरागत विधि से सिंचाई करें। वहीं, खेत में जलभराव होने पर अतिरिक्त पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें।

चूहों और कीटों से फसल बचाने की सलाह

जून के दूसरे या तीसरे सप्ताह में बोई गई कम अवधि वाली सोयाबीन फसल में चूहों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए फ्लोकोउमाफेन 0.005 प्रतिशत रसायन से बने प्रति हेक्टेयर 15-20 बेट चूहों के बिलों के पास रखने की सलाह दी गई है।

किसानों को खेत में 3-4 स्थानों के पौधों को हिलाकर नियमित रूप से जांच करने को कहा गया है। इससे इल्लियों और अन्य कीटों के प्रकोप का समय रहते पता लगाया जा सकता है। कीट दिखाई देने पर उसकी अवस्था के अनुसार उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

बर्ड-पर्चेस से कम होंगी इल्लियां

सोयाबीन खेतों में टी आकार के बर्ड-पर्चेस लगाने की सलाह भी दी गई है। इन पर कीटभक्षी पक्षी बैठते हैं, जिससे इल्लियों की संख्या कम करने में प्राकृतिक रूप से मदद मिलती है।

बीज उत्पादन वाले खेतों में फसल की शुद्धता बनाए रखने के लिए फूलों के रंग तथा पौधे, पत्तियों और तने पर मौजूद रोयों के आधार पर अलग किस्म के पौधों की पहचान कर उन्हें खेत से निकालने की सलाह दी गई है।

कृषि रसायन खरीदते समय बिल जरूर लें

कृषि विभाग ने किसानों से कीटनाशक, खरपतवारनाशक और फफूंदनाशक खरीदते समय पक्का बिल लेने की अपील की है। बिल पर उत्पाद का बैच नंबर और एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए।

किसानों को ऐसे रसायनों का उपयोग नहीं करने की सलाह दी गई है, जो सोयाबीन में उपयोग के लिए भारत सरकार के केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड की अनुशंसित सूची में शामिल नहीं हैं। जिन रसायनों के मिश्रित उपयोग की वैज्ञानिक अनुशंसा या पूर्व अनुभव उपलब्ध नहीं है, उनका मिश्रण बनाकर इस्तेमाल न करने की भी चेतावनी दी गई है।

विभाग ने किसानों से फसल की नियमित निगरानी करने और मौसम की स्थिति के अनुसार प्रबंधन उपाय अपनाने की अपील की है। किसी भी कृषि रसायन का प्रयोग कृषि विशेषज्ञों की सलाह और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही करने को कहा गया है।

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