CG News Times

‘हनुमान जी राममय हैं, इसलिए भगवान को सबसे अधिक प्रिय हैं’ – शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

सलधा/बेमेतरा, छत्तीसगढ़। सवा लाख शिवलिंगों के ऐतिहासिक मंदिर निर्माण के लिए चर्चित ग्राम सलधा में उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का चातुर्मास चल रहा है। चातुर्मास के दौरान आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और शंकराचार्य के प्रवचन का लाभ लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम कंदई के ग्रामीणों एवं महिला ब्राह्मण समाज कवर्धा द्वारा पादुका पूजन से हुआ। दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती ने सलधा में शिवलिंग स्थापित करने वाले भक्तों के नामों की घोषणा की, जबकि अप्रमेय स्वामी ने विरुदावली का वाचन किया।

‘हनुमान जी भगवान के आत्मस्वरूप हैं’

प्रवचन के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हनुमान जी की भक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि हनुमान जी भगवान राम के अत्यंत प्रिय भक्त हैं। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ज्ञान और भक्ति के अद्भुत स्वरूप हैं तथा पूर्ण रूप से राममय हैं।

उन्होंने आत्मीय प्रेम का उदाहरण देते हुए बृहदारण्यक उपनिषद का संदर्भ दिया और बताया कि मनुष्य अपने संबंधों में भी अंततः अपने सुख और आत्महित के लिए प्रेम करता है। इसी भाव को हनुमान जी ने भगवान राम के प्रति अपनी भक्ति में चरितार्थ किया। हनुमान जी भगवान के आत्मस्वरूप हैं, इसलिए वे भगवान राम को सर्वाधिक प्रिय हैं।

‘उत्तम सेवक वह, जो बिना कहे स्वामी की आवश्यकता समझ ले’

शंकराचार्य ने सेवक और शिष्य के गुणों की चर्चा करते हुए कहा कि उत्तम सेवक वह है जो अपने स्वामी या गुरु के मुख के भावों को देखकर ही उनकी आवश्यकता समझ जाए और बिना कहे सेवा कर दे। जो कहने पर तुरंत सेवा करे, वह मध्यम सेवक है, जबकि बार-बार कहने के बाद सेवा करने वाला अधम सेवक कहलाता है।

उन्होंने हनुमान जी की सेवा भावना से जुड़े प्रसंग भी सुनाए। भगवान राम के दरबार में सेवा बांटे जाने और हनुमान जी द्वारा भगवान की जम्हाई आने पर चुटकी बजाने की सेवा स्वीकार करने का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने हनुमान जी की अनन्य सेवा भावना को समझाया।

‘जिसमें राम नहीं, वह मेरे किसी काम का नहीं’

शंकराचार्य ने हनुमान जी और मोतियों की माला से जुड़ा प्रसिद्ध प्रसंग सुनाते हुए कहा कि माता सीता द्वारा दी गई मोतियों की माला को हनुमान जी ने इसलिए स्वीकार नहीं किया क्योंकि उसमें उन्हें राम दिखाई नहीं दिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके हृदय में भी राम हैं, तो हनुमान जी ने अपना हृदय खोलकर सीता, राम और लक्ष्मण के दर्शन करा दिए। यह प्रसंग सुनाकर उन्होंने बताया कि हनुमान जी की भक्ति में भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण था।

शनिदेव और हनुमान जी का प्रसंग भी सुनाया

प्रवचन में शंकराचार्य ने शनिदेव और हनुमान जी से जुड़ा प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि हनुमान जी ने शनिदेव को पराजित करने के बाद उनके आग्रह पर उन्हें क्षमा किया और अपने भक्तों को कष्ट न देने का वचन लिया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने हनुमान जी की शक्ति के साथ-साथ उनकी करुणा और भक्तवत्सलता को भी रेखांकित किया।

हनुमान जी के बल के संबंध में उन्होंने माता अंजना से जुड़े प्रसंग का भी वर्णन किया और बताया कि हनुमान जी की शक्ति और सामर्थ्य के पीछे उनकी माता का आशीर्वाद भी महत्वपूर्ण था।

साजा विधायक ईश्वर साहू ने लिया आशीर्वाद

इस अवसर पर साजा विधायक ईश्वर साहू ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से आशीर्वाद लिया। गुजरात से आए किशोरी दवे शास्त्री एवं विदुषी गार्गी पंडित ने भी अपने भाव प्रकट किए। कलाकारों द्वारा भजन एवं नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं।

प्रतिदिन पांच बार पूजन, वेदांत पाठ और सत्संग

चातुर्मास के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रतिदिन पांच बार पूजन करते हैं। पूजन का समय सुबह 4:30, 6:45, 9:45, शाम 4:45 और 6:45 बजे निर्धारित है। सुबह 8 से 9:30 बजे तक वेदांत पाठ तथा दोपहर 2:30 बजे से सत्संग एवं प्रवचन आयोजित होता है।

कार्यक्रम में दंडी स्वामी उमेश आश्रम, सुरेंद्र आश्रम, वासुदेवाश्रम, छोटे आश्रम, शिवाश्रम, रामाश्रम, ज्योतिर्मयानंद सरस्वती, अप्रमेय शिवसदातकृतानंद गिरी सहित अनेक संत-महात्मा, साधु-संत, वेदपाठी विद्यार्थी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आरती की और धार्मिक वातावरण भक्तिमय हो उठा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *