Mukhyamantri Rojgar Srijan Yojana: कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड के ग्राम उसरवाही की रहने वाली श्रीमती अश्वनी मेरावी ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर जिंदगी को नई दिशा दी है। कभी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहीं अश्वनी आज अपना रेडीमेड वस्त्र निर्माण व्यवसाय चला रही हैं और आत्मनिर्भर बनकर अपने माता-पिता का सहारा बन रही हैं। उनके इस बदलाव में मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मिले ऋण और अनुदान की अहम भूमिका रही।
2 लाख की परियोजना, 70 हजार का मिला अनुदान
अश्वनी मेरावी ने Mukhyamantri Rojgar Srijan Yojana के तहत सहायता प्राप्त कर पंडरिया में रेडीमेड वस्त्र निर्माण इकाई शुरू की। उनकी परियोजना की कुल लागत 2 लाख रुपये थी, जिसमें उन्हें 70 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।
Mukhyamantri Rojgar Srijan Yojana के माध्यम से मिले ऋण और अनुदान ने अश्वनी को अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया। उन्होंने इस सहायता का इस्तेमाल अपना रोजगार शुरू करने में किया और धीरे-धीरे अपने काम को आगे बढ़ाया।
परित्यक्ता महिला थीं, आर्थिक स्थिति थी कमजोर
अश्वनी बताती हैं कि Mukhyamantri Rojgar Srijan Yojana का लाभ मिलने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। परित्यक्ता होने के कारण स्वयं के भरण-पोषण के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता था। रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं होने से रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण था।
ऐसे समय में मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आया। ऋण और अनुदान की मदद से उन्होंने रेडीमेड वस्त्र निर्माण का काम शुरू किया और अपने हुनर को रोजगार का माध्यम बनाया।
‘विष्णु भइया की योजना से मिला सहारा’
अश्वनी मेरावी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ‘विष्णु भइया’ कहते हुए योजना से मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि योजना के तहत उन्हें लोन के साथ सब्सिडी भी मिली, जिससे अपना काम शुरू करने और आगे बढ़ाने का मौका मिला।
अश्वनी कहती हैं, “विष्णु भइया की इस योजना से मुझे लोन मिला और उसमें सब्सिडी भी मिली। इससे मुझे अपना काम शुरू करने, उसे आगे बढ़ाने और अपने हुनर को दिखाने का मौका मिला। आज मैं आत्मनिर्भर हूं और अपने माता-पिता का सहारा बन पा रही हूं।”
कारोबार से बढ़ा आत्मविश्वास और सम्मान
अपना व्यवसाय शुरू करने के बाद अश्वनी के जीवन में सिर्फ आर्थिक बदलाव ही नहीं आया, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई। व्यवसाय के कारण समाज में उनकी पहचान और मान-सम्मान बढ़ा है। लोगों से संपर्क बढ़ने के साथ अब वे अपने फैसले खुद लेने में सक्षम हैं।
पहले जहां आर्थिक परेशानियां उनके सामने बड़ी चुनौती थीं, वहीं आज रोजगार के माध्यम से वे सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। अपने माता-पिता का सहारा बनने की खुशी भी उनके लिए इस बदलाव को और खास बनाती है।

युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास
Mukhyamantri Rojgar Srijan Yojana का उद्देश्य युवाओं, महिलाओं और जरूरतमंद हितग्राहियों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को बैंक ऋण के साथ अनुदान की सुविधा दी जाती है, ताकि वे विनिर्माण, सेवा और व्यवसाय से जुड़ी इकाइयां शुरू कर सकें।
इस तरह की योजनाओं के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अश्वनी मेरावी की कहानी इसी दिशा में एक उदाहरण के तौर पर सामने आई है।
अश्वनी ने दी ऋण प्रक्रिया आसान करने की सलाह
Mukhyamantri Rojgar Srijan Yojana से लाभ मिलने के बावजूद अश्वनी का कहना है कि बैंक ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक कई बार हितग्राहियों को बार-बार बैंक जाना पड़ता है और प्रक्रिया में देरी होती है।
अश्वनी का सुझाव है कि यदि ऋण प्रक्रिया आसान और समयबद्ध हो जाए तो ज्यादा से ज्यादा लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं। इससे स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और जरूरतमंद लोग भी आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगे।
