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CG High Court: शिक्षिका के तबादले पर हाई कोर्ट की रोक, ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ को लेकर उठे गंभीर सवाल

CG High Court: शिक्षिका ने कहा- म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए न आवेदन दिया, न सहमति; 25 अगस्त के ट्रांसफर-कम-डेपुटेशन आदेश के प्रभाव पर अगली सुनवाई तक रोक

CG High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक शिक्षिका के तबादले से जुड़े मामले में अहम अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने बिना सहमति किए गए कथित म्यूचुअल ट्रांसफर के आधार पर जारी तबादला-कम-प्रतिनियुक्ति आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही शिक्षिका को उनकी वर्तमान पदस्थापना वाली जगह पर ही काम जारी रखने की अनुमति दी गई है।

मामले में याचिकाकर्ता ने स्पष्ट दावा किया है कि उन्होंने म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए न तो कोई आवेदन दिया था और न ही तबादले के लिए अपनी सहमति दी थी। इसके बावजूद 25 अगस्त 2026 को जारी आदेश में उनके स्थानांतरण का आधार ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ दर्ज किया गया।

CG High Court ने प्रारंभिक सुनवाई में उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद फिलहाल तबादला आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी।

क्या है पूरा विवाद?

याचिकाकर्ता राजकुमारी सोनी ने अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश शुक्ला के माध्यम से बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि वह वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पीडब्ल्यूडी रामपुर, विकासखंड कोरबा में पदस्थ हैं।

25 अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत उनका ट्रांसफर-कम-डेपुटेशन करते हुए उन्हें स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय, चैतमा, विकासखंड पाली, जिला कोरबा भेज दिया गया था।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, उन्हें वर्तमान पदस्थापना दिसंबर 2025 में ही मिली थी। यानी नई पदस्थापना मिलने के करीब आठ महीने बाद ही उनका तबादला कर दिया गया।

‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ के आधार पर तबादले पर उठे सवाल

याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश शुक्ला ने कोर्ट के सामने दलील दी कि 25 अगस्त के तबादला आदेश में स्थानांतरण का कारण ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ बताया गया है।

अधिवक्ता का कहना था कि याचिकाकर्ता ने इस तरह के पारस्परिक स्थानांतरण के लिए कोई आवेदन ही नहीं दिया था और न ही उन्होंने तबादले के लिए अपनी सहमति दी थी। ऐसे में आदेश में म्यूचुअल ट्रांसफर को आधार बनाए जाने पर सवाल उठाया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि दिसंबर 2025 में वर्तमान पदस्थापना मिलने के कुछ ही महीनों बाद तबादला किया जाना लागू स्थानांतरण नीति के अनुरूप नहीं है।

CG High Court ने तबादले पर लगाई अंतरिम रोक

प्रारंभिक सुनवाई के दौरान CG High Court ने उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन किया। कोर्ट के सामने यह तथ्य रखा गया कि याचिकाकर्ता को दिसंबर 2025 में वर्तमान पदस्थापना मिली थी और अगस्त 2026 में करीब आठ महीने के भीतर ही उनका तबादला कर दिया गया।

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से यह स्पष्ट दावा भी किया गया कि म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए उन्होंने कोई आवेदन या सहमति नहीं दी थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने 25 अगस्त 2026 के ट्रांसफर-कम-डेपुटेशन आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।

इसके साथ ही शिक्षिका को उनकी वर्तमान पदस्थापना वाली जगह पर ही काम जारी रखने की अनुमति दी गई है।

राज्य सरकार ने मांगा तीन सप्ताह का समय

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने नोटिस स्वीकार किया। उन्होंने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से तीन सप्ताह का समय मांगा।

CG High Court ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद मामले पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

अब 1 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

फिलहाल CG High Court के अंतरिम आदेश के बाद शिक्षिका को बड़ी राहत मिली है। 25 अगस्त को जारी तबादला-कम-प्रतिनियुक्ति आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक रहेगी और शिक्षिका वर्तमान पदस्थापना स्थल पर काम जारी रख सकेंगी।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी। उस दौरान राज्य सरकार के जवाब और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों के आधार पर कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि बिना आवेदन और सहमति के ‘म्यूचुअल ट्रांसफर’ दर्ज किए जाने के दावे पर कोर्ट आगे क्या रुख अपनाता है।

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