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शिव कथा सुनकर बदल सकता है जीवन! Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand ने बताए धर्म और सदाचार के सूत्र

सलधा में चल रहे दिव्य चातुर्मास में Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand ने सुनाया भगवान शिव की कथा का महात्म्य

बेमेतरा जिले के सलधा में सवा लाख शिवलिंग मंदिर निर्माण के बीच चल रहे चातुर्मास में जगद्गुरु Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand ने भगवान की कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कथा का श्रवण और मनन मनुष्य के जीवन की व्यथा दूर कर सकता है। युवाओं से भी धार्मिक कथाओं में शामिल होने का आह्वान किया।

सलधा में चल रहा शंकराचार्य का दिव्य चातुर्मास

सलधा। बेमेतरा जिले के ग्राम सलधा में सवा लाख शिवलिंग का ऐतिहासिक मंदिर निर्माणाधीन है। इसी धार्मिक भूमि पर उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का दिव्य एवं भव्य चातुर्मास चल रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत ग्राम सण्डी के समस्त ग्रामवासियों द्वारा पादुका पूजन के साथ हुई। इसके बाद दण्डी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने शिवलिंग स्थापित करने वाले भक्तों के नामों की घोषणा की। राजेंद्र शास्त्री जी ने विरुदावली का वाचन किया।

भगवान की कथा से जीवन की व्यथा होती है दूर

प्रवचन के दौरान परम पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने भगवान शिव की कथाओं के माध्यम से जीवन में धर्म, सत्य और सदाचार के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा केवल सुनने की चीज नहीं है, बल्कि कथा को सुनने के बाद उसका मनन करना चाहिए और उसमें बताई गई अच्छी बातों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने कथा परंपरा के माध्यम से धर्म और सदाचार का ज्ञान समाज तक पहुंचाने का मार्ग निकाला था। कथा के माध्यम से मनुष्य को अपने धर्म, कर्तव्य और सदाचार का बोध होता है।

Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand ने विशेष रूप से युवाओं से धार्मिक कथाओं में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कथा में वृद्ध लोगों की संख्या अधिक दिखाई देती है, जबकि युवाओं को भी भगवान की कथा सुनने और उसके संदेश को अपने जीवन में अपनाने के लिए आगे आना चाहिए।

भगवान शिव की कथाओं से सत्य का संदेश

Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand ने शतरुद्रसंहिता में वर्णित भगवान श्री शिव के 100 अवतारों की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक कथाओं में केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख भी मिलती है।

उन्होंने भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर हुए प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि इस कथा से मनुष्य को सत्य बोलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि झूठ बोलने के कारण ब्रह्मा जी और केतकी को शाप मिला, जबकि सत्य के कारण भगवान विष्णु जगत पूज्य हुए।

 

 

कथा के प्रभाव से बदल सकता है जीवन

Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand ने देवराज नामक ब्राह्मण की कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि देवराज गलत आचरण वाला व्यक्ति था और उसने जीवन में अनेक पाप किए। एक बार प्रयागराज पहुंचने पर उसने मंदिर में चल रही शिव कथा सुनी। बीमारी के बाद उसकी मृत्यु हो गई और कथा के प्रभाव से उसे भगवान शिव के धाम कैलाश की प्राप्ति हुई।

इसी तरह उन्होंने बिन्दुग और चंचुला की कथा का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान की कथा मनुष्य के जीवन को बदलने की शक्ति रखती है।

चंचुला ने शिव कथा के माध्यम से अपने कर्मों के परिणाम को समझा और पश्चाताप करते हुए अपना शेष जीवन भगवान शिव की भक्ति और आराधना में समर्पित कर दिया। वहीं बिन्दुग को भी शिव महापुराण की कथा सुनने का अवसर मिला और कथा के प्रभाव से उसे भगवान के धाम की प्राप्ति हुई।

Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand ने कहा कि भगवान की कथा बड़े से बड़े पापी का भी उद्धार करने में समर्थ है।

धार्मिक शिक्षा और संस्कार पर भी रखी बात

प्रवचन के दौरान शंकराचार्य जी ने देश में धार्मिक शिक्षा और संस्कारों से जुड़े विषय पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वे संविधान का सम्मान करते हैं, लेकिन धार्मिक शिक्षा को लेकर समाज में एक विचित्र स्थिति दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि कथा और धार्मिक परंपराओं के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को धर्म, संस्कार और सदाचार का ज्ञान दिया जा सकता है।

Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand की दैनिक पूजा और सत्संग का कार्यक्रम

चातुर्मास के दौरान शंकराचार्य जी महाराज की दैनिक धार्मिक दिनचर्या भी निर्धारित है।

  • सुबह 4:30 बजे पूजन
  • सुबह 6:45 बजे पूजन
  • सुबह 8:00 से 9:30 बजे वेदांत पाठ
  • सुबह 9:45 बजे पूजन
  • दोपहर 2:30 बजे सत्संग एवं प्रवचन
  • शाम 4:45 बजे पूजन
  • शाम 6:45 बजे पूजन

प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भक्तों ने धार्मिक कथा एवं सत्संग का लाभ लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर भगवान की आरती की।

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