बेमेतरा। जिले के ग्राम सलधा में सवा लाख शिवलिंग स्थापना का धार्मिक आयोजन चल रहा है। यहां उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का चातुर्मास भी चल रहा है। बुधवार को श्रद्धालुओं ने पादुका पूजन किया और शंकराचार्य के प्रवचन का लाभ लिया।
प्रवचन में शंकराचार्य ने भगवान शिव की महिमा, शिवलिंग पूजन और प्रदक्षिणा के महत्व पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को नमस्कार और प्रदक्षिणा प्रिय है। उन्होंने विभिन्न देवी-देवताओं की प्रदक्षिणा की परंपरा का भी उल्लेख किया।
सलधा में क्यों खास है 80 प्रदक्षिणा?

शंकराचार्य ने कहा कि सलधा में सवा लाख शिवलिंग स्थापित किए जा रहे हैं। ऐसे में यहां 80 प्रदक्षिणा करने पर एक करोड़ प्रदक्षिणा के बराबर पुण्य प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है और शिवलिंग पूजन से सभी देवताओं की पूजा का फल प्राप्त होता है।
भगवान की शरण में आने की कही बात

शंकराचार्य ने शिव पुराण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति जीवन में कितना भी गलत रास्ते पर चला जाए, उसे निराश नहीं होना चाहिए। भगवान की शरण में आने और गलत काम छोड़ने का संकल्प लेने से जीवन बदल सकता है।
उन्होंने गुणनिधि की कथा सुनाते हुए बताया कि किस तरह भगवान शिव की कृपा से उसके पापों का नाश हुआ और उसे आगे शिव भक्ति का अवसर मिला।
तमोगुण, रजोगुण और सत्वगुण समझाया
प्रवचन में शंकराचार्य ने तीन गुणों की भी व्याख्या की। उन्होंने कहा कि तमोगुण से आलस्य और प्रमाद आता है, रजोगुण व्यक्ति को कर्म की ओर ले जाता है, जबकि सत्वगुण से सुख, प्रकाश और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
अयोध्या धाम से आए संतोष दुबे ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने राम मंदिर निर्माण के संघर्ष का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य से अयोध्या में आश्रम बनाने की अपील की।
सलधा में चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन पूजन, वेदांत पाठ और सत्संग-प्रवचन का आयोजन हो रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और अंत में सामूहिक आरती की गई।
