राजधानी रायपुर के चर्चित Telibandha Chowk का नाम बदलने की घोषणा के बाद अब इसे लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 7 अक्टूबर 2026 को एक कार्यक्रम के दौरान तेलीबांधा चौक का नाम बदलकर ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद साहू समाज की ओर से नाम बदलने पर आपत्ति जताते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
‘तेलीबांधा’ सिर्फ चौक का नाम नहीं
साहू समाज का कहना है कि Telibandha Chowk केवल रायपुर का एक सामान्य चौक नहीं है, बल्कि यह शहर के इतिहास, संस्कृति और साहू समाज की आस्था, पहचान और गौरव से जुड़ा हुआ है। समाज के मुताबिक इस नाम के साथ कई पीढ़ियों की यादें, भावनाएं और पुरखों का स्वाभिमान जुड़ा हुआ है। ऐसे में चौक का नाम बदलना समाज की ऐतिहासिक पहचान को प्रभावित करने वाला कदम होगा।
समाज की ओर से कहा गया है कि तेलीबांधा चौक का विकास और सौंदर्यीकरण किया जाए तो उसका स्वागत है। चौक को और बेहतर बनाने, सुविधाएं बढ़ाने और आकर्षक बनाने में किसी तरह की आपत्ति नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर इसकी मूल पहचान बदलना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
‘विकास के नाम पर हमारी विरासत से समझौता क्यों?’ समाज की ओर से यह सवाल उठाते हुए कहा गया है कि चौक का विकास और सौंदर्यीकरण स्वीकार है, लेकिन उसकी ऐतिहासिक पहचान बदलना स्वीकार नहीं है।
सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करने की मांग
साहू समाज ने सरकार से आग्रह किया है कि Telibandha Chowk के ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व को समझते हुए इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट किया जाए और जनभावनाओं का सम्मान किया जाए। समाज का कहना है कि विकास तभी सार्थक है, जब वह शहर की विरासत और पहचान को साथ लेकर आगे बढ़े।
अब सवाल यह है कि क्या Telibandha Chowk का नाम बदलने की घोषणा के बाद सरकार इस मांग पर कोई स्पष्टीकरण देगी? फिलहाल इस मुद्दे को लेकर सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
