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बस्तर में 3,800 दिव्यांगों के पुनर्वास का महाअभियान: नक्सल हिंसा पीड़ितों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण

रायपुर।  बस्तर में नक्सल हिंसा और आईईडी विस्फोटों से प्रभावित दिव्यांगजनों के पुनर्वास के लिए जगदलपुर में तीन दिवसीय विशाल शिविर शुरू हुआ है। धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में आयोजित शिविर में बस्तर संभाग के चार जिलों के 3,800 से अधिक जरूरतमंदों का पंजीयन हुआ है। यहां कृत्रिम हाथ-पैर के साथ व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स, बैसाखी और श्रवण यंत्र निःशुल्क दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिविर का वर्चुअल शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सली हिंसा का सामना करता रहा, लेकिन अब यह अंचल शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, शिविर सिर्फ उपकरण बांटने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण देने की पहल है।

विजय शर्मा बोले- हर पीड़ित को अपने पैरों पर खड़ा करना जरूरी

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं है। आईईडी और बारूदी सुरंगों के कारण अपने अंग गंवा चुके हर नागरिक को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नक्सली धमाकों में लोगों ने अपने पैर गंवाए, लेकिन बस्तर के लोगों का आत्मबल नहीं टूटा। उन्होंने आईईडी ब्लास्ट में घायल ग्रामीण संतोष पोयाम और ड्यूटी के दौरान घायल पुलिस जवान राकेश कुमार यादव व घासीराम मांझी का उल्लेख किया। अब ये लोग कृत्रिम अंगों की मदद से बिना सहारे चलने के लिए तैयार हैं।

मौके पर ही तैयार हो रहे कृत्रिम हाथ-पैर

यह अभियान जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, NSE फाउंडेशन और भारतीय जैन संघटना के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जा रहा है।

शिविर में ऑन-साइट कार्यशाला बनाई गई है, जहां विशेषज्ञ दिव्यांगजनों का नाप लेकर मौके पर ही कृत्रिम हाथ, पैर और कैलिपर्स तैयार कर रहे हैं। पहले दिन 70 से अधिक हितग्राहियों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए।

इसके अलावा जरूरतमंदों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी और श्रवण यंत्र भी निःशुल्क दिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम शिविर में ही दिव्यांगजनों की जांच कर मेडिकल सर्टिफिकेट जारी कर रही है। पात्र हितग्राहियों को दिव्यांग पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है।

5 से 7 अक्टूबर तक पहला चरण

 

 

भारतीय जैन संघटना के डॉ. अतुल जैन ने बताया कि यह शिविर पहले कवर्धा में प्रस्तावित था, लेकिन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के सुझाव पर बस्तर के पीड़ितों को प्राथमिकता दी गई।

शिविर का पहला चरण 5 से 7 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें बस्तर, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुर जिले के हितग्राहियों को लाभ मिलेगा। अकेले बस्तर जिले से 1,570 हितग्राही इसमें शामिल हैं।

दूसरे चरण का शिविर 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा में होगा। इसमें दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के जरूरतमंदों को लाभ दिया जाएगा।

बस्तर को नक्सल हिंसा से बाहर निकालने पर जोर

बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने के संकल्प के साथ पीड़ितों के पुनर्वास को प्राथमिकता देने की बात कही।

कार्यक्रम में जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, जिला पंचायत CEO तन्मय खन्ना सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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