Bhilai Steel Plant Scrap Case: भिलाई स्टील प्लांट से करीब 250 टन स्क्रैप चोरी और उसे बाहर खपाने के आरोपों की जांच अब CBI करेगी। मामले में ट्रांसपोर्टर, ड्राइवर, लोडर, स्क्रैप कारोबारी और BSP कर्मचारियों की कथित भूमिका सामने आई है। सितंबर में पुलिस ने मामले में 21 गिरफ्तारियों की जानकारी दी थी।
भिलाई स्टील प्लांट यानी BSP से जुड़े 250 टन स्क्रैप चोरी मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार ने मामले की CBI जांच को मंजूरी देते हुए नोटिफिकेशन जारी किया है। यानी अब तक दुर्ग पुलिस की जांच के दायरे में रहे इस मामले के कई पहलुओं की पड़ताल केंद्रीय जांच एजेंसी कर सकती है।
मामला उस समय सामने आया था, जब 26 मई 2026 को पुरानी भिलाई थाना पुलिस को अकलोरडीह-हथखोज इलाके में BSP के कथित चोरी के स्क्रैप के अवैध भंडारण की सूचना मिली थी। कार्रवाई के दौरान लौह प्लेट, बीम और कटिंग समेत करीब 250 टन स्क्रैप बरामद किया गया था। इसके बाद पुरानी भिलाई थाने में अपराध क्रमांक 277/2026 दर्ज किया गया था।
फ्लू डस्ट की आड़ में बाहर निकल रहा था स्क्रैप
पुलिस की जांच में आरोप सामने आया कि स्क्रैप को प्लांट से बाहर निकालने के लिए फ्लू डस्ट से भरे ट्रकों का इस्तेमाल किया जाता था। आरोप है कि वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री छिपाकर उन्हें प्लांट से बाहर ले जाया जाता था।
जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को ट्रांसपोर्टर, ड्राइवर, लोडर, स्क्रैप कारोबारी और BSP से जुड़े कुछ कर्मचारियों की कथित भूमिका के बारे में जानकारी मिली। शुरुआती कार्रवाई में जब्त किए गए स्क्रैप की मात्रा करीब 250 टन बताई गई थी और स्क्रैप के साथ कई वाहन और मशीनरी भी जब्त की गई थी।
19 से बढ़कर 21 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ी। जुलाई तक 16 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। बाद में BSP से जुड़े कर्मचारियों और चोरी के स्क्रैप को कथित तौर पर खपाने वालों पर भी कार्रवाई हुई। सितंबर में रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड, रसमड़ा से जुड़े दो डायरेक्टरों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कुल 21 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी।
BSP ने अपनी आंतरिक जांच के बाद तीन कर्मचारियों को भी निलंबित किया था। इससे मामले में प्लांट के भीतर की संभावित भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जांच का दायरा बढ़ा।
करोड़ों की संपत्ति और वाहन भी जांच के दायरे में
पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में करीब 250 टन स्क्रैप के अलावा हाईवा, ट्रक, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य मशीनरी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जब्त सामग्री और वाहनों की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर यह भी पता लगाया कि BSP से बाहर निकाले गए स्क्रैप को अलग-अलग जगहों पर जमा करने के बाद आगे बेचने या औद्योगिक इकाइयों में खपाने की कोशिश की जाती थी। रायपुर पावर एंड स्टील से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच का यह पहलू और महत्वपूर्ण हो गया है।
अब CBI खंगालेगी पूरा नेटवर्क
राज्य सरकार की ओर से CBI जांच को मंजूरी मिलने के बाद अब मामले से जुड़े दस्तावेज और अब तक की पुलिस जांच का रिकॉर्ड केंद्रीय जांच एजेंसी के सामने जा सकता है। इसके बाद CBI चोरी के कथित नेटवर्क, प्लांट से स्क्रैप बाहर निकालने के तरीके, परिवहन व्यवस्था और इसे आगे खपाने से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 250 टन से ज्यादा स्क्रैप आखिर किस नेटवर्क के जरिए प्लांट से बाहर पहुंचा और इसमें किस-किस स्तर पर कथित मिलीभगत थी? पुलिस जांच में अब तक हुई गिरफ्तारियों के बाद भी यदि CBI को नए तथ्य और नाम मिलते हैं, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।
