Chhattisgarh Train Delay: त्योहारों का सीजन करीब है, लेकिन छत्तीसगढ़ में ट्रेनों की लेटलतीफी यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है। बिलासपुर रेल जोन में ट्रेनों की पंक्चुअलिटी करीब 50% तक पहुंचने की बात सामने आई है। बारिश और रेल नेटवर्क पर क्षमता से अधिक ट्रेनों के संचालन को भी देरी की प्रमुख वजहों में बताया जा रहा है।
त्योहारों से पहले ट्रेनों की बिगड़ी चाल
छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाली कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों की लेटलतीफी ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निर्धारित समय पर स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को ट्रेन के इंतजार में घंटों प्लेटफॉर्म पर रुकना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग ट्रेनों से सफर करते हैं।
यात्रियों का कहना है कि ट्रेन के कुछ घंटे लेट होने का असर सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं रहता। नौकरी पर जाने वाले लोगों से लेकर परीक्षा, इलाज और दूसरे जरूरी कामों के लिए सफर करने वालों का पूरा शेड्यूल प्रभावित हो जाता है।
60-70% होनी चाहिए पंक्चुअलिटी, 50% तक पहुंची
ट्रेनों की देरी को लेकर रेलवे अधिकारियों के हवाले से सामने आया है कि बिलासपुर रेल जोन में ट्रेनों की सामान्य पंक्चुअलिटी करीब 60 से 70% के आसपास होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा परिचालन दबाव के चलते यह करीब 50% तक पहुंच गई है
रेलवे नेटवर्क पर क्षमता के मुकाबले अधिक ट्रेनों के संचालन का असर यात्री ट्रेनों की समयबद्धता पर पड़ रहा है। बिलासपुर रेल जोन में मालगाड़ियों का परिचालन भी काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन के बीच तालमेल बनाए रखना रेलवे के लिए चुनौती बना हुआ है।
हालांकि, अलग-अलग ट्रेनों और स्टेशनों पर देरी का स्तर एक जैसा नहीं है। उपलब्ध ट्रेन-ट्रैकिंग आंकड़ों में कुछ ट्रेनों के निर्धारित समय के आसपास चलने की स्थिति भी दिखाई देती है, जबकि कुछ ट्रेनों में लंबी देरी दर्ज की गई है।
बारिश ने भी बिगाड़ा रेल परिचालन
छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में हुई भारी बारिश ने भी रेल परिचालन को प्रभावित किया है। रायपुर पहुंचने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनें देरी से पहुंचीं। वहीं बालोद क्षेत्र में भारी बारिश के कारण रेलवे ट्रैक प्रभावित होने के बाद कुछ ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि कुछ ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया।
यानी ट्रेनों की लेटलतीफी के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं है। एक तरफ रेल नेटवर्क पर परिचालन का दबाव है, तो दूसरी तरफ मौसम से जुड़े व्यवधान भी समयबद्धता को प्रभावित कर रहे हैं
यात्रियों का सवाल- आखिर समय पर कब चलेंगी ट्रेनें?
लगातार हो रही देरी से यात्रियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि रेलवे को मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के परिचालन के बीच बेहतर संतुलन बनाना चाहिए, ताकि जरूरी काम से यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी न हो।
त्योहारों के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में अगर अभी से ट्रेनों की पंक्चुअलिटी करीब 50% तक पहुंच गई है, तो आने वाले दिनों में रेलवे व्यवस्था के सामने और चुनौती खड़ी हो सकती है।
अब नजर इस बात पर है कि रेलवे त्योहारों के सीजन को देखते हुए ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है। यात्रियों को उम्मीद है कि परिचालन दबाव और मौसम से जुड़े व्यवधानों के बीच ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे ट्रेनें निर्धारित समय के करीब चल सकें।
