कवर्धा। कबीरधाम जिले में ‘मोर गांव मोर पानी’ महा अभियान के सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। वर्षा जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीणों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस अभियान के तहत जिले में बड़ी संख्या में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। इससे गांवों में पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ खेती, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
राष्ट्रीय पंचायत दिवस 24 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने “गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में” संरक्षित करने के उद्देश्य से इस महा अभियान की शुरुआत की थी। अभियान के तहत विकसित भारत जी राम जी योजना के माध्यम से अमृत सरोवर, आजीविका डबरी, नवा तरिया, सोख्ता गड्ढे और पहाड़ी क्षेत्रों में कंटूर ट्रेंच जैसी जल संरचनाएं विकसित की गई हैं।
280 आजीविका डबरी से 280 एकड़ में सिंचाई

कबीरधाम जिले में 280 आजीविका डबरी का निर्माण किया गया है। प्रत्येक डबरी का आकार करीब 20×20 मीटर है। इनसे लगभग 280 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने की उम्मीद है। साथ ही भू-जल स्तर बढ़ाने और आसपास के हैंडपंपों को रिचार्ज करने में भी मदद मिलेगी। डबरियों में मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों के जरिए ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
25 नवा तरिया से 125 एकड़ क्षेत्र को लाभ

जिले में 25 नवा तरिया का निर्माण कराया गया है। प्रत्येक तरिया करीब 80×80 मीटर क्षेत्र में है। इनसे लगभग 125 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। इसके अलावा भू-जल संवर्धन, हैंडपंप रिचार्ज, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और सामूहिक वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
2 लाख से अधिक सोख्ता गड्ढों से भू-जल संरक्षण
जल संचय जनभागीदारी के तहत ग्रामीणों और महिला समूहों सहित लोगों ने अपने घरों के आंगन में स्वप्रेरणा से 2 लाख से अधिक सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया है। इन गड्ढों के माध्यम से बारिश का पानी जमीन में पहुंच रहा है, जिससे भू-जल स्तर बढ़ाने में मदद मिल रही है। इनका निर्माण ग्रामीणों ने स्वयं किया है और इसके लिए किसी प्रकार की राशि खर्च नहीं की गई।
स्टॉप डैम से खेतों को मिला पानी
गांवों के बरसाती नालों में छोटे स्टॉप डैम भी बनाए गए हैं। इससे बारिश का पानी बहकर निकलने के बजाय रुक रहा है और जरूरत के अनुसार खेतों की सिंचाई में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे भू-जल स्तर और आसपास के हैंडपंपों के रिचार्ज में भी मदद मिल रही है।
मत्स्य पालन से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय
जल संरचनाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए मत्स्य पालन विभाग द्वारा अभिसरण के माध्यम से हितग्राहियों को तकनीकी सहायता और मछली बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। निजी डबरी के हितग्राहियों को जरूरत के अनुसार 1 से 5 किलो तक रोहू और कतला जैसी मछलियों का बीज दिया जा रहा है। करीब 5 से 6 महीने में मछलियां तैयार होने के बाद हितग्राही स्थानीय बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
विकासखंड बोड़ला की ग्राम पंचायत राली, बाटीपथरा, अमेरा, तितरी, पिपरखुटा, साजाटोला, समनापुर और तरेगांव मैदान सहित अन्य 35 आजीविका डबरी के हितग्राहियों तथा सहसपुर लोहारा क्षेत्र के 2 हितग्राहियों को मत्स्य विभाग द्वारा मछली बीज उपलब्ध कराया जा चुका है।
जल संरक्षण से समृद्धि की ओर बढ़ रहा कबीरधाम
‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान ने कबीरधाम में जल संरक्षण, रोजगार और ग्रामीण आजीविका को एक साथ जोड़ने का काम किया है। वनांचल से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक जल संरचनाओं में पानी का संग्रह होने से सिंचाई, भू-जल संवर्धन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और आय के नए अवसरों को मजबूत आधार मिल रहा है।
