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Navami पर हवन करने की सोच रहे हैं? जान लें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Navratri Navami 2026: शारदीय नवरात्रि में Navami तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के समापन पर कई श्रद्धालु कन्या पूजन, हवन और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन इस साल नवमी तिथि को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि पूजा और हवन 19 अक्टूबर को करना उचित रहेगा या 20 अक्टूबर को?

दी गई पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार, अलग-अलग पंचांगों में Navami तिथि शुरू होने के समय में अंतर बताया गया है। सामान्य हिंदू पंचांग के अनुसार, 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 52 मिनट से नवमी तिथि शुरू होने की जानकारी दी गई है, जबकि महावीर पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि सुबह 7 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगी। ऐसे में पूजा का समय तय करने से पहले स्थानीय पंचांग और अपने क्षेत्र के पंडित से पुष्टि करना उचित रहेगा।

शास्त्रों के अनुसार Navami पूजा के लिए कौन-सा दिन शुभ?

धर्म सिंधु और निर्णय सिंधु के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, यदि Navami तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर मध्याह्न काल तक रहती है, तो उस दिन Navami पूजा और व्रत करना उचित माना जाता है। वहीं, अष्टमी के साथ नवमी तिथि का संयोग भी कुछ परंपराओं में विशेष महत्व रखता है।

इस वर्ष उदया तिथि के आधार पर 20 अक्टूबर को भी Navami पूजा का विचार सामने आ रहा है। हालांकि, पंडित नरेंद्र उपाध्याय के मत के अनुसार, 19 अक्टूबर को नवमी तिथि शुरू होने के बाद पूजा और हवन करना शुभ रहेगा।

इसलिए पूजा की तारीख तय करते समय तिथि के आरंभ, स्थानीय सूर्योदय और अपनी परंपरा को ध्यान में रखना जरूरी है।

हवन का क्या है मुहूर्त

इस वर्ष अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 7 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होने के बाद नवमी तिथि शुरू होगी। महावीर पंचांग के अनुसार, सोमवार सुबह 7 बजकर 54 मिनट से नवमी तिथि प्रारंभ होगी।

उनके बताए मत के अनुसार, नवमी तिथि शुरू होने के बाद दिनभर पूजा-पाठ और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हवन के लिए अग्निवास का विचार किया जाता है, लेकिन नवमी तिथि लगने के बाद हवन किया जा सकता है। शुभ कार्य का समय निर्धारित करते हुए राहुकाल का ध्यान रखने की सलाह भी दी गई है।

ध्यान दें: पंचांगों में तिथि और मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकते हैं। यहां दिए गए समय उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं; पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।

19 अक्टूबर 2026 को Navami पूजा और हवन के शुभ मुहूर्त

दी गई जानकारी के अनुसार, 19 अक्टूबर को पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए ये मुहूर्त बताए गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:43 से 5:34 बजे तक
  • प्रातः संध्या: सुबह 5:09 से 6:24 बजे तक
  • अमृत काल: सुबह 8:29 से 10:16 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:00 से 2:45 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग: 19 अक्टूबर दोपहर 3:38 बजे से 20 अक्टूबर सुबह 6:25 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:48 से 6:13 बजे तक
  • सायाह्न संध्या: शाम 5:48 से 7:03 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: रात 11:41 बजे से 20 अक्टूबर रात 12:31 बजे तक

ध्यान रहे कि ऊपर दिए गए सामान्य शुभ मुहूर्त और नवमी तिथि के अनुसार पूजा का समय अलग-अलग विषय हैं। नवमी पूजा या हवन के लिए मुहूर्त चुनते समय स्थानीय पंचांग में तिथि की स्थिति भी देखनी चाहिए।

19 अक्टूबर को कब न करें पूजा और हवन?

दी गई पंचांग जानकारी के अनुसार, 19 अक्टूबर को सुबह 7:50 बजे से 9:15 बजे तक राहुकाल बताया गया है। परंपरागत मान्यता के अनुसार, इस अवधि में शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है।

हालांकि, राहुकाल का समय भी स्थान के अनुसार बदल सकता है। इसलिए हवन या विशेष पूजा की तैयारी कर रहे श्रद्धालु अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर लें।

Navami पर हवन और कन्या पूजन का क्या है महत्व?

नवरात्रि की Navami पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। अनेक परिवारों में इस दिन हवन, कन्या पूजन और व्रत के पारण की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी कुल परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन अनुष्ठानों को संपन्न करते हैं।

इस बार Navami तिथि को लेकर अलग-अलग समय सामने आने के कारण सबसे जरूरी है कि पूजा की तारीख और हवन का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार तय किया जाए। 19 अक्टूबर को नवमी तिथि शुरू होने के बाद पूजा और हवन किए जा सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अपने क्षेत्र की पंचांग गणना के आधार पर लेना बेहतर रहेगा।

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