बिजनेस डेस्क। जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का IPO खुलने के पहले ही दिन 21 अक्टूबर को 3.04 गुना सब्सक्राइब हो गया। करीब ₹30,188 करोड़ के इस इश्यू के लिए लगभग ₹67 हजार करोड़ की बोलियां लगाई गईं। IPO में निवेश के लिए 23 अक्टूबर तक आवेदन किया जा सकता है।
कंपनी ने इस IPO के जरिए ₹30,188 करोड़ जुटाने के लिए करीब 27 करोड़ शेयर जारी किए हैं। IPO खुलने से पहले ही 212 एंकर निवेशकों को 7.24 करोड़ शेयर बेचकर ₹8,110 करोड़ जुटाए जा चुके हैं।
बड़े निवेशकों ने 9 गुना लगाई बोली
IPO के पहले दिन संस्थागत निवेशकों ने अपने निर्धारित कोटे के मुकाबले करीब 9 गुना सब्सक्रिप्शन किया। वहीं, आम निवेशकों की श्रेणी में 73% सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया। कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से को 133% और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के हिस्से को 141% सब्सक्रिप्शन मिला।
आम निवेशकों के लिए आरक्षित 19,75,25,934 शेयरों के मुकाबले 60,10,21,860 शेयरों के लिए आवेदन मिले। कुल मिलाकर IPO को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है।
एक लॉट के लिए ₹13,428 लगाने होंगे
जियो IPO का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर तय किया गया है। अपर प्राइस बैंड के आधार पर एक लॉट में 12 शेयरों के लिए निवेशकों को कम से कम ₹13,428 लगाने होंगे। निवेशक अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए करीब ₹1.88 लाख की जरूरत होगी।
₹1,377 पर लिस्टिंग का अनुमान
IPO के ग्रे मार्केट में शेयर का प्रीमियम करीब ₹258 प्रति शेयर बताया जा रहा है। यह अपर प्राइस बैंड ₹1,119 के मुकाबले लगभग 23% अधिक है। इस हिसाब से शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत ₹1,377 आंकी जा रही है।
हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम अनौपचारिक बाजार पर आधारित होता है। यह लिस्टिंग के दिन मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं देता और वास्तविक लिस्टिंग कीमत इससे अलग हो सकती है।
IPO से जुटाई रकम से चुकाया जाएगा कर्ज
कंपनी IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपनी प्रमुख सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) के कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए करेगी।
IPO के बाद प्रमोटर और प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 66.43% से घटकर 64.48% होने का अनुमान है। वहीं, सार्वजनिक शेयरधारिता 33.57% से बढ़कर 35.52% हो जाएगी।
रिलायंस के शेयरधारकों को भी मिलेगा मौका
रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारक IPO में आरक्षित श्रेणी के तहत आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए पात्र निवेशकों के पास 14 अक्टूबर तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के सार्वजनिक इक्विटी शेयर होने चाहिए थे। यह सुविधा निर्धारित पात्रता और नियामकीय शर्तों के अधीन है।
एंकर निवेशकों से जुटाए ₹8,110 करोड़
IPO आम निवेशकों के लिए खुलने से पहले कंपनी ने 212 एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित कर ₹8,110 करोड़ जुटाए। एंकर निवेशकों में बड़े एसेट मैनेजर, सॉवरेन वेल्थ फंड, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और पेंशन फंड शामिल थे।
कंपनी ने 19 जून को IPO के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा किया था। इसके बाद 28 अगस्त को बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से ऑब्जर्वेशन लेटर मिला। कंपनी ने 14 अक्टूबर को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल किया था।
जियो के 53.3 करोड़ सब्सक्राइबर
जियो प्लेटफॉर्म्स देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल है। 30 जून 2026 तक कंपनी का कुल सब्सक्राइबर बेस 53.3 करोड़ था। इसमें 28.49 करोड़ 5G यूजर शामिल थे।
मुंबई मुख्यालय वाली जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस समूह की टेक्नोलॉजी कंपनी है। कंपनी मोबाइल नेटवर्क सेवाओं के साथ 5G तकनीक, नेटवर्क सॉफ्टवेयर और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भी काम करती है।
क्या होता है IPO और GMP?
जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों को खरीदने के लिए जारी करती है, तो इसे इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO कहा जाता है। कंपनियां इसके जरिए कारोबार के लिए पूंजी जुटाती हैं।
वहीं, ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) वह अतिरिक्त कीमत है, जिस पर अनौपचारिक बाजार में IPO के शेयरों की खरीद-बिक्री की उम्मीद जताई जाती है। निवेशक इससे संभावित लिस्टिंग का अनुमान लगाते हैं, लेकिन यह आधिकारिक कीमत नहीं होती और इसमें बदलाव हो सकता है।
