दस्तावेज पूरे होने के बाद भी अटक रहे आवेदन, रकम देने वालों के काम आसानी से होने का दावा; सेवा सेतु केंद्र संचालक भी सवालों के घेरे में


कबीरधाम/सहसपुर लोहारा। शासन की ऑनलाइन व्यवस्था और आम लोगों को सुविधाजनक तरीके से आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बीच सहसपुर लोहारा तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि छोटे से छोटे राजस्व एवं प्रमाण पत्र संबंधी कार्यों के लिए लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और जाति प्रमाण पत्र के अस्थाई एवं स्थाई अप्रूवल के नाम पर कथित तौर पर मोटी रकम की मांग की जा रही है।
शासन की व्यवस्था के अनुसार हितग्राही जनसेतु/सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से आवेदन करता है। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, जिनका परीक्षण संबंधित स्तर पर किया जाता है। दस्तावेज सही पाए जाने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ती है। लेकिन सहसपुर लोहारा तहसील को लेकर सामने आ रहे आरोप इस पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं।
दस्तावेज पूरे, फिर भी अप्रूवल नहीं?
आरोप है कि कई मामलों में दस्तावेज पूर्ण होने, लिंक एवं मिलान सही होने के बावजूद जाति प्रमाण पत्र का अस्थाई अप्रूवल लंबित रखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों में भी कथित रूप से अप्रूवल किए जाने की शिकायत है, जिनमें दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां या कमियां मौजूद हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कथित रूप से ‘रकम’ और ‘पहुंच’ के आधार पर काम की गति बदल जाती है। यदि आरोप सही हैं तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता है, बल्कि उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के साथ अन्याय भी है, जिन्हें सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, शिक्षा एवं अन्य जरूरी कार्यों के लिए प्रमाण पत्र की तत्काल आवश्यकता होती है।
सेवा सेतु केंद्र संचालक क्यों हो रहे बदनाम?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी परेशानी सेवा सेतु केंद्र संचालकों के सामने भी खड़ी हो रही है। हितग्राही सीधे तहसील कार्यालय में जाकर किसी कर्मचारी को कथित भुगतान नहीं कर सकता। ऐसे में यदि किसी स्तर पर अवैध रकम की मांग की जाती है तो उसका माध्यम सेवा सेतु केंद्र संचालकों को बनाया जा रहा है, ऐसे आरोप स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे हैं।
इसका परिणाम यह है कि तहसील की कथित अनियमितताओं का ठीकरा सेवा सेतु केंद्र संचालकों के सिर फूट रहा है। कई संचालक भी इस व्यवस्था से परेशान बताए जा रहे हैं, क्योंकि आवेदनकर्ता सीधे उनसे सवाल करता है कि उसका प्रमाण पत्र अप्रूव क्यों नहीं हुआ।

गरीब हितग्राही आखिर जाए तो जाए कहां?
सबसे बड़ा सवाल उन गरीब और आम परिवारों का है, जो सरकारी व्यवस्था पर भरोसा करके प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचते हैं। यदि दस्तावेज पूरे होने के बाद भी आवेदन सिर्फ इसलिए रोका जाता है कि कथित रूप से कोई ‘व्यवस्था’ नहीं की गई, तो फिर शासन द्वारा बनाई गई ऑनलाइन एवं सुविधा आधारित प्रणाली का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
क्या सहसपुर लोहारा तहसील में प्रमाण पत्र का अप्रूवल नियम और दस्तावेजों के आधार पर हो रहा है या कथित लेन-देन और पहुंच के आधार पर? यह जांच का विषय है।
