छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित CGPSC Recruitment Scam की जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने रायपुर, दुर्ग और जशपुर में 5 ठिकानों पर छापेमारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के PA के.के. चंद्रवंशी के भांजे उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया है। ED ने यह गिरफ्तारी PMLA की धारा 19 के तहत की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, CGPSC भर्ती प्रक्रिया में नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये जुटाने के मामले की जांच की जा रही है।
ED की कार्रवाई के बाद इस भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में हलचल और बढ़ गई है। जांच एजेंसी ने तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और संपत्ति से संबंधित कागजात बरामद किए हैं। अब इन दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच के जरिए पैसों के लेन-देन और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है।
5 ठिकानों पर ED की बड़ी छापेमारी
CGPSC भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में ED ने रायपुर, दुर्ग और जशपुर में कुल 5 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी की कार्रवाई के दौरान कई ऐसे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं, जिनसे मामले में कथित वित्तीय लेन-देन की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइसेज को जांच एजेंसी ने अपने कब्जे में लिया है। इसके अलावा संपत्तियों से संबंधित कागजात और वित्तीय रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। ED अब इन सभी सबूतों का विश्लेषण कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर जुटाई गई रकम कहां और किन लोगों तक पहुंची।
नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये जुटाने का आरोप
ED के मुताबिक, CGPSC भर्ती घोटाले की जांच में नौकरी दिलाने के एवज में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये लेने की बात सामने आई है। एजेंसी के अनुसार उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर पर अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ रुपये जुटाने का आरोप है।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस रकम में से करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए गए। अब ED इसी कथित पैसों के नेटवर्क और लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि रकम किन माध्यमों से इकट्ठा की गई और इस पूरे मामले में अन्य कौन-कौन से लोग शामिल हो सकते हैं।
गिरफ्तारी के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार
उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद CGPSC भर्ती घोटाले की जांच और तेज होने की संभावना है। ED अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के जरिए कथित वित्तीय नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा सकती है।
जांच एजेंसी द्वारा बरामद किए गए डिजिटल उपकरण और दस्तावेज भी मामले में अहम माने जा रहे हैं। इनसे सामने आने वाली जानकारी के आधार पर आगे अन्य लोगों से पूछताछ या कार्रवाई की जा सकती है।
डिजिटल और वित्तीय सबूतों की होगी जांच
ED की तलाशी में मिले डिजिटल डिवाइसेज और वित्तीय रिकॉर्ड जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। एजेंसी इन रिकॉर्ड्स के जरिए कथित लेन-देन, बैंकिंग गतिविधियों और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी सामने आ सकता है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इसका लाभ किन लोगों तक पहुंचा। हालांकि जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं माना जा सकता।
CGPSC घोटाले में आगे और बड़े नाम सामने आएंगे?
उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच एजेंसी की कार्रवाई का दायरा आगे और बढ़ेगा? 5 ठिकानों पर हुई छापेमारी से मिले दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच के बाद ED को कथित भर्ती नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।
फिलहाल ED की कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC Recruitment Scam मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन और नौकरी दिलाने के नाम पर रकम जुटाने के आरोपों की जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी की पूछताछ और जब्त दस्तावेजों से मामले में और क्या खुलासे होते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।
