Surguja Crime News: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कांग्रेस नेता गुरप्रीत सिंह को डाक के जरिए मिला एक पत्र चर्चा का विषय बन गया है। पत्र में उनकी हत्या की कथित साजिश रचे जाने का दावा किया गया है। इसमें जेल में बंद एक आरोपी के साथ कुछ अन्य लोगों के शामिल होने और शूटरों से संपर्क किए जाने की बात भी लिखी गई है। हालांकि, पत्र में किए गए इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले को गंभीर बताते हुए गुरप्रीत सिंह ने कांग्रेस नेताओं के साथ एसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है और अपनी सुरक्षा की मांग की है।
पत्र में जेल में बंद आरोपी पर साजिश रचने का आरोप
जानकारी के मुताबिक, पत्र भेजने वाले ने दावा किया है कि जेल में बंद सुनील साहू कथित तौर पर श्याम विश्वकर्मा और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर गुरप्रीत सिंह की हत्या की योजना बना रहा है। पत्र में शूटरों से संपर्क और बड़ी रकम के लेनदेन का भी जिक्र किया गया है।
पत्र में राउरकेला निवासी रमेश कुमार शर्मा उर्फ टिट्टू, झारखंड निवासी मनोज उर्फ भूत सरकार और शंकर मुंडा सहित कुछ अन्य लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन सभी आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
दो महीने पहले गुरप्रीत सिंह के साथ हुई थी मारपीट
बताया जा रहा है कि करीब दो महीने पहले गुरप्रीत सिंह के घर के सामने मारपीट की घटना हुई थी। इस दौरान सुनील साहू और श्याम विश्वकर्मा के नाम सामने आए थे। गुरप्रीत सिंह की शिकायत पर सुनील साहू के खिलाफ मणिपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस कार्रवाई के बाद सुनील साहू फिलहाल सेंट्रल जेल में बंद है।
अब डाक से मिले पत्र में इसी पुराने विवाद का जिक्र करते हुए हत्या की कथित साजिश का दावा किया गया है।
एसपी कार्यालय पहुंचकर की सुरक्षा की मांग
पत्र मिलने के बाद गुरप्रीत सिंह कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही जेल में बंद आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है।
मामले में पुलिस ने पत्र की जांच कराने और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है।
पत्र के दावों की जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पत्र में किए गए दावे कितने सही हैं। यदि पत्र में दी गई जानकारी सही पाई जाती है, तो यह गंभीर सुरक्षा का मामला हो सकता है। वहीं, यदि पत्र में लगाए गए आरोप निराधार हैं, तो यह भी जांच का विषय होगा कि आखिर किसने और किस उद्देश्य से ऐसा पत्र भेजा। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर है।
