Bilaspur Viral Infection: मौसम में बदलाव के साथ बिलासपुर में वायरल संक्रमण का असर बढ़ता दिखाई दे रहा है। SIMS समेत शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों की OPD में रोजाना 2,000 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 20 से 25 प्रतिशत मरीज सर्दी, खांसी, छींक, नाक बहना, गले में खराश और बदन दर्द जैसी शिकायतों के साथ डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।
सिम्स के एमएस और मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. लखन सिंह के मुताबिक, इस बार वायरल संक्रमण काफी संक्रामक नजर आ रहा है और मरीजों को पूरी तरह ठीक होने में सामान्य से अधिक समय लग रहा है।
हर पांचवां-छठवां व्यक्ति सर्दी-खांसी से परेशान
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव, हवा में नमी और तापमान के उतार-चढ़ाव का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। अस्पतालों में वायरल से जुड़े लक्षणों वाले मरीजों की संख्या लगातार दिखाई दे रही है।
डॉक्टरों के मुताबिक कई मरीजों में तेज बुखार के बजाय सर्दी, खांसी, नाक बहना, छींक, कमजोरी और बदन दर्द जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। दवाओं से राहत तो मिल रही है, लेकिन संक्रमण पूरी तरह खत्म होने में समय लग रहा है।
10 दिन से ज्यादा रह रहा असर
आमतौर पर मौसमी वायरल संक्रमण कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन मौजूदा मामलों में मरीजों को पूरी तरह स्वस्थ होने में 10 दिन से ज्यादा का समय लग रहा है। कई लोगों को ठीक होने के बाद भी कुछ समय तक कमजोरी और थकान महसूस हो रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण होने के बाद जल्दबाजी में सामान्य दिनचर्या में लौटने के बजाय पर्याप्त आराम करना जरूरी है।
SIMS में इलाज और दवाएं उपलब्ध
वायरल संक्रमण से निपटने के लिए अस्पताल में आवश्यक दवाएं उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। मरीजों का इलाज किया जा रहा है और डॉक्टर लक्षणों के आधार पर उपचार की सलाह दे रहे हैं।
डॉ. लखन सिंह ने लोगों को सलाह दी है कि अगर सर्दी-खांसी, नाक बहने के साथ लगातार सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी महसूस हो तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।
खुद से एंटीबायोटिक लेना पड़ सकता है भारी
डॉक्टर ने लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं मेडिकल स्टोर से लेकर खाने से बचने की सलाह दी है। किसी भी दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना बेहतर है।
Bilaspur Viral Infection: वायरल से बचने के लिए क्या करें?
संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही हाथों को साबुन-पानी से धोते रहें और गंदे हाथों से आंख, नाक और मुंह छूने से बचें।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या टिशू से ढकना भी जरूरी है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए पौष्टिक आहार, ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन करें। पर्याप्त आराम और 7-8 घंटे की नींद भी जरूरी है।
