Kawardha Mahakal Palki Yatra: सावन के अंतिम सोमवार पर कवर्धा में बाबा महाकाल की भव्य पालकी शोभायात्रा निकली
Kawardha Mahakal Palki Yatra: सावन के आखिरी सोमवार पर कवर्धा की सड़कों पर ऐसा आस्था का सैलाब उमड़ा कि पूरा शहर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। आखिर इस भव्य यात्रा में कितने श्रद्धालु पहुंचे और महाआरती में कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हुए? जानिए कवर्धा की इस ऐतिहासिक पालकी यात्रा की पूरी कहानी।
Kawardha Mahakal Palki Yatra: सावन के अंतिम सोमवार पर कवर्धा में उमड़ा आस्था का महासैलाब
छत्तीसगढ़ की धर्मनगरी कवर्धा में सावन के अंतिम सोमवार पर आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। हर हर शंकर, जय जय शंकर सेवा समिति की ओर से 24 अगस्त 2026 को राजाधिराज भगवान भोलेनाथ की भव्य पालकी शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा में हजारों की संख्या में शिवभक्त शामिल हुए और पूरा शहर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
आयोजन समिति के मुताबिक, पालकी यात्रा में करीब 50 से 60 हजार शिवभक्तों के शामिल होने का दावा किया गया। कवर्धा के अलावा प्रदेश के दूसरे जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में पहुंचे।
बूढ़ा महादेव मंदिर से शुरू हुई Kawardha Mahakal Palki Yatra
आयोजन समिति के मुख्य आयोजक उमंग पाण्डेय के अनुसार, पालकी शोभायात्रा की शुरुआत 24 अगस्त को दोपहर करीब 3 बजे बूढ़ा महादेव मंदिर (जानकी रमण प्रभु देवालय), कवर्धा से हुई।
भगवान महाकाल की पालकी के साथ यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर आगे बढ़ी। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए और यात्रा का स्वागत किया।
इसके बाद यात्रा अंबेडकर चौक पहुंची, जहां भस्म आरती और शाही आरती का आयोजन किया गया। आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया और इसी के साथ पालकी यात्रा का समापन हुआ।

नागपुर की काली झांकी और ढोल-ताशा रहा आकर्षण
पालकी यात्रा को भव्य रूप देने के लिए नागपुर से विशेष झांकियां और कलाकारों की टीम भी बुलाई गई थी। आयोजन में मां काली की झांकी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही।
इसके अलावा नागपुर के प्रसिद्ध 3 स्टार धुमाल, ढोल-ताशा, डमरू और अखाड़े ने यात्रा के माहौल को और भव्य बना दिया। धार्मिक संगीत और जयघोष के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा के साथ चलते नजर आए।
Kawardha Mahakal Palki Yatra: दूसरे जिलों से भी पहुंचे श्रद्धालु
आयोजन समिति के मुताबिक, महाकाल पालकी यात्रा में सिर्फ कवर्धा ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के दूसरे जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचे।
शहर की सड़कों पर जगह-जगह शिवभक्तों की भीड़ दिखाई दी। आयोजकों ने दावा किया कि इस बार यात्रा में करीब 50 से 60 हजार श्रद्धालुओं की भागीदारी रही।

महाआरती में शामिल हुए कई बड़े नाम
आयोजन समिति के मुख्य आयोजक सौरभ शर्मा के अनुसार, महाआरती को विशेष रूप से भव्य बनाने के लिए कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य अतिथि भी शामिल हुए।
महाआरती में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, ज्योतिर्मठ के CEO चंद्रप्रकाश उपाध्याय, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, अतुल देशलहरा, पूर्व पंडरिया विधायक मोतीराम चंद्रवंशी, ईश्वरी साहू, चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, मनीराम साहू, गणेश तिवारी, नितेश अग्रवाल, सलिल चंद्राकर और मनोज ठाकुर समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
Kawardha Mahakal Palki Yatra: डिप्टी CM विजय शर्मा ने आयोजकों की तारीफ की
महाआरती में शामिल उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आयोजन समिति के सदस्यों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कवर्धा में उन्होंने पहली बार इतनी बड़ी ऐतिहासिक भीड़ देखी है।
उन्होंने आयोजन के पीछे समिति के सदस्यों और कार्यकर्ताओं की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ही कवर्धा की पहचान को धर्मनगरी के रूप में और मजबूत करते हैं।
आयोजकों ने भविष्य में और बड़ा आयोजन करने की बात कही
आयोजन के संरक्षक और ज्योतिर्मठ के CEO चंद्रप्रकाश उपाध्याय ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने आयोजन को आगे और अधिक भव्य एवं ऐतिहासिक रूप देने की बात कही।
हालांकि उनके वक्तव्य में धार्मिक-सामाजिक संदर्भ में तीखी भाषा का भी इस्तेमाल किया गया, जिसे आयोजकों के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आयोजन का मुख्य केंद्र भगवान महाकाल की पालकी, धार्मिक अनुष्ठान और शिवभक्तों की भागीदारी रही।

Kawardha Mahakal Palki Yatra: आयोजन समिति ने जताया आभार
Kawardha Mahakal Palki Yatra के सफल आयोजन के बाद समिति ने सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों, कलाकारों और सहयोगियों का आभार जताया। आयोजन समिति में प्रमुख रूप से उमंग पाण्डेय और सौरभ शर्मा समेत अन्य सदस्य शामिल रहे।
सावन के अंतिम सोमवार पर आयोजित यह भव्य पालकी यात्रा कवर्धा में धार्मिक आस्था और सामूहिक भागीदारी का बड़ा आयोजन बनकर सामने आई। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और भगवान महाकाल के जयघोष ने पूरे शहर को भक्तिमय माहौल में रंग दिया।
