14 सितंबर से देशभर में गणेशोत्सव की शुरुआत हो रही है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस बार गणपति स्थापना के लिए पूरे दिन में 5 शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। मान्यता है कि शुभ समय में गणेशजी की स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
गणेश चतुर्थी पर घरों के साथ-साथ कार्यालयों, दुकानों, कारखानों और अन्य प्रतिष्ठानों में भी गणपति की स्थापना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में पूजा के लिए बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा को शुभ माना जाता है, जबकि व्यावसायिक स्थानों पर खड़ी मुद्रा वाली गणेश प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा है।
गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालु प्रतिदिन भगवान गणेश की पूजा करते हैं। सुबह और शाम दीपक जलाने के साथ गणेशजी को दूर्वा, फूल और भोग अर्पित किया जाता है। इसके बाद आरती और मंत्र जाप किया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचने की भी धार्मिक मान्यता है।
इस साल गणेशोत्सव का प्रमुख विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन 25 सितंबर को किया जाएगा। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन बाद भी गणपति विसर्जन किया जाता है।
गणेश चतुर्थी पर क्यों होती है गणपति स्थापना?
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन गणेशजी की प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजा की जाती है।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि-विवेक का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले गणेशजी की पूजा करने की परंपरा इसी मान्यता से जुड़ी है। गणेशोत्सव के दौरान भक्त गणपति को अपने घर या प्रतिष्ठान में आमंत्रित कर उनकी पूजा करते हैं और उत्सव के समापन पर श्रद्धा के साथ विसर्जन करते हैं।
गणपति स्थापना के 5 शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा स्थापना के लिए दिनभर में अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। इनमें अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त चुनकर गणपति स्थापना की जा सकती है।
पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिमा स्थापित करने से पहले पूजा का स्थान साफ कर लिया जाए और वहां चौकी या आसन तैयार किया जाए।
घर के लिए कैसी गणेश प्रतिमा रखें?
घर में गणपति स्थापना के लिए छोटी और मिट्टी से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में बैठे हुए गणेशजी को गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना गया है।
प्रतिमा बहुत बड़ी रखने की बजाय ऐसी प्रतिमा रखना बेहतर माना जाता है, जिसकी रोजाना आसानी से पूजा और सेवा की जा सके। पर्यावरण की दृष्टि से मिट्टी की प्रतिमा को भी बेहतर विकल्प माना जाता है।
दुकान और ऑफिस में कैसी प्रतिमा शुभ मानी जाती है?
व्यापारिक प्रतिष्ठानों जैसे दुकान, ऑफिस या कारखाने में खड़ी मुद्रा वाले गणेशजी की प्रतिमा रखने की परंपरा बताई जाती है। इसका संबंध सक्रियता, कार्य और प्रगति से जोड़ा जाता है।
हालांकि प्रतिमा का चयन श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। सबसे जरूरी है कि गणेश प्रतिमा को सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाए और नियमित पूजा की जाए।
गणपति स्थापना के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?
गणेशजी की पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। सामान्य रूप से पूजा में इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है—
- गणेशजी की प्रतिमा
- चौकी और साफ कपड़ा
- कलश
- रोली और अक्षत
- दूर्वा
- फूल और माला
- दीपक और घी/तेल
- धूप और अगरबत्ती
- पंचामृत
- फल
- मोदक या अन्य मिठाई
- नारियल
- सुपारी
- पान
- पूजा की थाली
दूर्वा और मोदक को गणेश पूजा में विशेष महत्व दिया जाता है।
गणपति स्थापना की आसान पूजा विधि
सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर कपड़ा बिछाएं। इसके बाद गणेशजी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें। प्रतिमा के पास कलश रखें और दीपक जलाएं।
गणेशजी को रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद पंचामृत से प्रतीकात्मक रूप से पूजा करें और साफ जल अर्पित करें। भगवान को मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं।
इसके बाद गणेशजी के मंत्र का जाप करें और आरती करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान गणेश से सुख, शांति, समृद्धि और सभी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना कर सकते हैं।
गणेशजी का कौन सा मंत्र पढ़ें?
गणेश पूजा में सबसे सरल और प्रचलित मंत्र है—
ॐ गं गणपतये नमः।
पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ इस मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके अलावा गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करने की भी परंपरा है।
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से क्यों बचते हैं?
गणेश चतुर्थी से जुड़ी धार्मिक कथाओं में चंद्रमा से संबंधित एक प्रसंग मिलता है। इसी वजह से इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा देखने पर मिथ्या कलंक लगने का दोष बताया गया है।
इसी कारण कई लोग इस दिन विशेष रूप से चंद्रमा के दर्शन से बचते हैं।
गणेशोत्सव का समापन कब होगा?
गणेशोत्सव सामान्य तौर पर 10 दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान अलग-अलग दिनों में श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार गणपति विसर्जन करते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को होगी और इसी दिन गणेशोत्सव का मुख्य विसर्जन किया जाएगा।
विसर्जन के समय भक्त गणपति की पूजा कर उन्हें विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हैं।
गणेशोत्सव से जुड़ी मान्यता
गणेशजी को बुद्धि, विवेक, शुभता और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। इसलिए गणेश चतुर्थी सिर्फ प्रतिमा स्थापना का पर्व नहीं, बल्कि घर-परिवार और कार्यक्षेत्र में सकारात्मकता तथा शुभ शुरुआत की कामना से जुड़ा त्योहार भी है।
गणेशोत्सव के दौरान भक्त भगवान गणेश की आराधना करते हैं, प्रसाद बांटते हैं और परिवार के साथ उत्सव मनाते हैं। अंत में गणपति बप्पा को श्रद्धा के साथ विदाई देकर अगले साल फिर आने का निमंत्रण दिया जाता है।
