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Rahul Gandhi के मनुस्मृति बयान से क्यों भड़का संत समाज? Swami Avimukteshwaranand ने कह दी बड़ी बात

Rahul Gandhi Manusmriti Controversy

मनुस्मृति और हिंदू धर्मशास्त्रों को लेकर Rahul Gandhi के कथित बयानों पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दी तीखी प्रतिक्रिया

मनुस्मृति को लेकर Rahul Gandhi के कथित बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ऐसा पलटवार किया है, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। नारी सम्मान, शास्त्रीय संदर्भ और संविधान से लेकर BJP को मनुस्मृति से जोड़ने के आरोप तक, शंकराचार्य ने अपने बयान में क्या-क्या कहा? पढ़िए इस विवाद की पूरी कहानी।

Rahul Gandhi Manusmriti Controversy: मनुस्मृति विवाद पर शंकराचार्य का राहुल गांधी को तीखा जवाब

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi द्वारा हिंदू धर्मशास्त्र और मनुस्मृति को लेकर दिए गए कथित बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 23 अगस्त को जारी एक प्रेस वक्तव्य में शंकराचार्य ने राहुल गांधी पर प्राचीन शास्त्रीय संदर्भों को राजनीतिक बहस में संदर्भ से काटकर पेश करने और इससे समाज में भ्रम पैदा होने का आरोप लगाया है।

शंकराचार्य के वक्तव्य के अनुसार, पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान Rahul Gandhi ने मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों को लेकर जो बातें कहीं, उनमें शास्त्रों की सतही समझ दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए प्राचीन धर्मशास्त्रों के संदर्भों को अलग तरीके से प्रस्तुत करना भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समझने के लिहाज से उचित नहीं है।

‘रक्षा और दायित्व को परतंत्रता बताना गलत’

शंकराचार्य ने मनुस्मृति के चर्चित श्लोक ‘पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने…’ का संदर्भ देते हुए Rahul Gandhi की कथित व्याख्या पर सवाल उठाया।

उनके अनुसार, शास्त्रीय संदर्भ में इस श्लोक को परिवार और समाज की ओर से महिला की सुरक्षा तथा दायित्व से जोड़कर देखा जाना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि इसे सीधे तौर पर स्त्री की परतंत्रता या दासता के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्राचीन ग्रंथ की व्याख्या उसके मूल संदर्भ, भाषा और परंपरा को समझकर की जानी चाहिए।

सनातन परंपरा में नारी को ‘शक्ति’ का स्वरूप बताया

शंकराचार्य ने अपने वक्तव्य में भारतीय वाङ्मय में महिलाओं की भूमिका और सम्मान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में नारी को केवल आश्रित के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि उसे ‘शक्ति’ और ‘महानिर्मात्री’ जैसे स्वरूपों में प्रतिष्ठित किया गया है।

उन्होंने ऋग्वेद की ऋषिकाओं और भारतीय परंपरा में सम्मानित महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की मूल भावना परस्पर सम्मान, दायित्व और कर्तव्य पर आधारित रही है।

BJP को मनुस्मृति से जोड़ने के आरोप पर भी प्रतिक्रिया

शंकराचार्य ने राहुल गांधी के उस कथित राजनीतिक आरोप पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें भारतीय जनता पार्टी को मनुस्मृति समर्थक बताया गया है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की शासन व्यवस्था संविधान के अनुसार संचालित होती है। उनके अनुसार किसी राजनीतिक दल को मनुस्मृति से जोड़ना राजनीतिक भ्रम पैदा करने वाला कथन है।

उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि हिंदू धर्मशास्त्रों को लेकर सार्वजनिक बयान देने से पहले उनके मूल संदर्भ, भाषा और व्याख्या का गंभीर अध्ययन किया जाना चाहिए।

Rahul Gandhi Manusmriti Controversy

Rahul Gandhi Manusmriti Controversy

‘बयानबाजी से बाज आएं’ -शंकराचार्य की चेतावनी

अपने वक्तव्य में शंकराचार्य ने राहुल गांधी के कथित मनुस्मृति विरोधी बयानों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म और शास्त्रों के विषय में बिना पर्याप्त अध्ययन के की गई टिप्पणियां समाज में भ्रम और वैमनस्य पैदा कर सकती हैं।

उन्होंने राहुल गांधी से ऐसी कथित धर्मविरोधी और शास्त्रविरोधी बयानबाजी से बचने की अपील की। साथ ही कहा कि यदि इस तरह की टिप्पणियां जारी रहती हैं तो संत समाज और सनातन समाज की ओर से विरोध और मुखर हो सकता है।

मनुस्मृति और संविधान पर फिर तेज हुई बहस

शंकराचार्य का यह वक्तव्य ऐसे समय सामने आया है, जब मनुस्मृति, संविधान, नारी सम्मान और हिंदू धर्मशास्त्रों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है।

राहुल गांधी के कथित बयानों पर शंकराचार्य की प्रतिक्रिया ने इस बहस को धार्मिक और शास्त्रीय विमर्श का एक नया आयाम दे दिया है। अब इस मुद्दे पर राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।

फिलहाल शंकराचार्य के बयान के बाद मनुस्मृति और सनातन परंपरा को लेकर राजनीतिक तथा धार्मिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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